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कांतिलाल चौधरी

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My Articles

*नए वर्ष से कामना* हे! नए वर्ष तुम आ गए हो सभी को खुश रखना पूरे साल! सभी को ऐसी हिम्मत लौटाना हर मुसीबत का सामना करें मेहनत उनसे इतनी कर read more >>
*दिसम्बर का आगमन* दिसम्बर तुम आते हो सभी को नचा जाते हो यह महीना ठण्ड की पेटी पुरा महीना खुली रहती कापे तन कापे मन दिसम्बर तुम आते � read more >>
( किसान की लगन) मिलन सूरज का संदेशा पूरब की लाली पहचान चिड़िया के जगने से पहले खाट छोड़ उठ गया किसान खिला पिला बैलों को लेकर करने चला ख read more >>
( चल पड़े किसान खेतों में) सिर पर पगड़ी कमर में धोती पैरों में चमडे़ के जूते हल कंधे रख चला किसान आगे-आगे चल रहे बैल लगते बिल्कुल सीध� read more >>
फूल खिले एक बार खिले ना बारंबार जीवन मिले एक बार मिले ना बारंबार उड़ा सके जितनी गमक फूल खिले एक बार जीवन मिले ना बारंबार ठौर पा सके ए� read more >>
दो पल की ये जिंदगी आज बचपन कल जवानी परसों बुढापा भी चलो हसकर जिए खुलकर करिए फिर ना आए रात सुहानी फिर में आए दिन सुहाना आज बीत गया जो बी read more >>
क्या वह भी दिन थे। बचपन था या स्वर्लोक धूप में खेले धूल में खेले मां बाप के गोद में खेले खेले साथियों के साथ में क्या वह भी दिन थे। मां read more >>
रिमझिम रिमझिम बरखा बरखे फसलों पर तो ओला बरखें। कुटिया में पानीडो़ टपके। अंबर ज्यों दही का मटका। � read more >>
दिन है सर्दी का कोहरा छाया है। सरसों के सुमन पर रजत बिखरी पड़ी। भानु निकल रहा कि कोकिला चल पड़े भृग भाग रहे सरसों के सुमन पर क्या पत read more >>
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