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समाज में आवारा कुत्तों का आतंक

akhilesh Shrivastava 24 Feb 2026 आलेख समाजिक आजकल समाज में आवारा कुत्तों के काटने एवं झपटने से बच्चे,बड़े ,बूड़े सभी बहुत भयभीत हैं 9623 0 Hindi :: हिंदी

आजकल आवारा कुत्तों के नियंत्रण को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है।डाग लवर्स, एवं पशु अधिकार कार्यकर्ता तथा कुछ राजनैतिक नेता , अभिनेता इन आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने पर आपत्ति जता रहे हैं।।

              ज्ञात हो कि बड़े बड़े अमीर लोग इनके पारिवारिक सदस्य एवं बच्चे तो अपने अपने बंगलों से कारों में बाहर निकलते हैं। इनका मार्निंग वॉक भी बड़े बड़े बंगलों एवं गार्डन में हो जाता है। परेशानी तो गरीब तथा मिडिल क्लास परिवार एवं उनके बच्चों की है ,जो कि आम दिनचर्या में स्कूल  ,कालेज  ,मार्निंग वाक, एवं बाजार पैदल -साईकिल या टू -व्हीलर से आते जाते हैं ।
आवारा कुत्ते इन आम नागरिकों का पीछा करते हैं एवं इकठ्ठा होकर हमला करके घायल करते हैं एवं अपने  पैने दांतों से काट देते हैं ।
इन आम पीड़ित परिवारों को फिर मंहगे मंहगे रेबीस़ के इंजेक्शन लगवाने एवं उचित इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती होना पड़ता है।
कई बार तो पीड़ित व्यक्ति को जान से हाथ धोना पड़ता है
                 समाज में यदि कोई इंसान समाज में ,हिंसात्मक कार्य करता है जिससे इंसान घायल हो या उसकी मौत हो सकती हो तो ऐसे अपराधी को  सजा स्वरूप दंड दिया जाता है , उसे कारावास भेजे जाने का प्रावधान है। 
           ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों के लिए शैल्टर होम में रखने के  विचार पर मतभेद क्यों ?..
  इस समय देश के कई शहरों में कुत्तों के नियंत्रण से सम्बंधित समस्या के विरुद्ध डाग लवर्स संगठनों द्वारा प्रदर्शन किये जा रहे हैं 
डाग लवर्स संगठनों एवं पशु अधिकार कार्यकर्ता को चाहिए कि वे जनहित में गांवों कस्बों शहरों में  विभिन्न मोहल्लों क्षेत्रों में एन जी ओ एवं क्षेत्रीय जनों के सहयोग से कुत्तों के लिए कवर्ड शेल्टर होम  बनाकर उसमें उन्हें रखें एवं  समय-समय क्षेत्रीय जनों के सहयोग से  उनके भोजन  सुरक्षा एवं इलाज़ इत्यादि की उचित व्यवस्था करने का प्रयास कर सकें तो उचित होगा 
डाग लवर्स एवं उनके हितेषी संगठनों को मानवीयता को ध्यान में रखकर समाज  हित में पीड़ित  परिवार की व्यथा एवं दर्द को भी समक्षना चाहिए जिनके परिवार के बच्चे बुजुर्ग एवं अन्य सदस्य  कुत्तों के काटने से उनसे बिछुड़ गये।
सरकार या कोर्ट यदि आवरा कुत्तों के नियंत्रण एवं शैल्टर के लिए  कोई सुझाव दे रही है तो इसमें क्या बुराई है।
                प्रत्येक निर्णय का विरोध करना ही जरूरी नहीं है हमें जनहित में विचार करने  के बाद ही उसका विरोध करना उचित रहता है।

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