Poonam Mishra 10 Apr 2023 आलेख समाजिक कई वर्षों बाद में अपने घर पहुंची घर को घर कहा 30854 0 Hindi :: हिंदी
आज बहुत दिन के बाद मैं अपने घर लौट कर आई !बहुत खुशी हुई !और हंसते-हंसते दौड़ती हुए मैंने अपने घर का दरवाजा खोला और मैं सोफे पर बैठ गई और जोर-जोर से कहने लगी हां !यह मेरा घर है !इस घर में मैं सदियों रही हूंl इस घर की कमी मुझे बहुत खलती रही l फिर मैंने दौड़ कर खिड़की के दरवाजे खोलें l मेरे दरवाजे खुलते ही कुछ पक्षी कबूतर चिड़िया मेरे घर के अंदर प्रवेश कर गए !सूरज की रोशनी सीधे मेरे कमरे के बेड तक पहुंच गई ,अरे? यह क्या यह सब तो जैसे मेरी तरह ही चिल्ला चिल्ला कर कह रही हैं हां ,यह मेरा घर ,है तभी मैंने सामने बिस्तर के ऊपर रजाई को उठाया इसे मैं धूप में डाल दूं l मैंने यह देखा कि छोटे छोटे चूहे के बच्चे खेल रहे हैं ,शायद चुहिया ने बच्चे दिए हैं हां सही तो है यह इनका भी तो घर है यह भी मुझसे कह रहे हैं यह मेरा भी घर है तभी मैंने दीवार के ऊपर देखा कुछ मकड़ी ने जाले लगा रखे हैं ,छिपकली इधर-उधर घूम रही है, मेरे दरवाजा खोलने के साथ ही घर में जितने भी जीव जंतु थे, सब हलचल में आ गए शायद ,यह सब मुझसे चीख चीख कर कह रहे हैं यह मेरा भी घर है ,अब आप ही बताओ मैं कैसे कहूं कि यह सिर्फ और सिर्फ मेरा घर है? स्वरचित लेखिका पूनम मिश्रा उत्तर प्रदेश वाराणसी