Meenakshi Tyagi 28 May 2026 आलेख अन्य Aruna pooja Anjali 5151 0 Hindi :: हिंदी
हेलो दीपाली मैडम, दीपाली मैडम मैं उस दिन के बारे में आपसे बात करना चाहती हूं और आशा करती हूँ कि आप मेरी बात को समझने की कोशिश करेंगी, क्योंकि उस दिन जो कुछ भी हुआ ठीक नहीं है हुआ न मेरी तरफ से और न ही आपकी तरफ से। पहले दिन जब मैं स्कूल आई तब मेरी डायरी पूरी ही इनकंप्लीट थी, तब मैने बोला कि आज मेरे पास काम ज्यादा है आप लोग ले लो क्लास और तभी प्रभा मैडम ने मैथ्स क्लास लेने को कहा , बात वही खत्म हो जानी चाहिए थी, क्योंकि प्रभा मैडम मैथ्स क्लास ले रही थी पर आपने बोला काम तो करना पड़ेगा स्कूल आए है तो काम करना पड़ेगा , मैने तब भी आपको पलटकर कुछ नहीं बोला क्योंकि प्रभा मैडम ने क्लास ले ली थीं। उसके बाद जब मुझे लगा कि मेरा काम कंट्रोल में है तब मैने पुष्पांजलि मैडम से कई बार बोला कि मैं एस एस टी की क्लास ले लेती हूँ पर पुष्पांजलि मैडम ने बोला कि कोई बात नहीं आप अपना काम कंप्लीट कर लो, नहीं तो मैं उस दिन क्लास लेती क्योंकि ऑनलाइन क्लास लेना कोई भारी काम नहीं है, बल्कि मुझे लगता है कि ऑफलाइन से तो और भी ईजी है। अगले दिन जब मेरा समर ब्रेक अनाउंस हुआ तब मुझे लगा आज आज का दिन है जिसमें रजिस्टर पूरा करना है, 2 महीने के नाम भी लिखने है, डायरी पूरी करनी है पर उस दिन भी जो बात विनम्रता से हो सकती थी उसको आपने गुस्से में बोला जबकि पहले दिन मैने एस एस टी की क्लास लेने को बोला था, तब भी आपने बोला कि कल भी आपने ऐसे ही बोल दिया था काम तो करना पड़ेगा। न ही लेसन प्लान बनाने है न क्लास लेनी है, मैडम, हम सब वहां पर सहकर्मी है न कोई छोटा न बड़ा सब काम करने आए है ये मुझे भी पता है पर हममें से कोई भी एक दूसरे को गुस्से में ऑर्डर देने का अधिकार नहीं रखता है, यहां तक कि प्रिंसिपल सर और वी पी मैडम भी किसी की गलती को गुस्से में चीखकर नहीं बोलते, और मेरी गलती थी भी नहीं तब भी आप गुस्से में बोली । मैं कभी भी खाली बैठकर बात नहीं करती हूँ वहां.... और उस दिन भी मैं खाली नहीं बैठी थी मैडम , काम ही कर रही थी। मैने भी बोला कि इस ग्रुप में आग लगाने का काम आप ही करती है, वरना सब आराम से और प्यार से काम कर सकते है , जो बात आसानी से हल हो सकती थी उसको बढ़ाकर न आपने सही किया न ही मैने। हम लोग उम्र के आधे पड़ाव पर आकर भी, जहां हमें मैच्योर लोगो के जैसे बिहेव करना चाहिए बिल्कुल बच्चों के जैसे लड़े, एक दूसरे पर चीखे। हम सब टीचर्स हैं। जब हम खुद पर ही कंट्रोल नहीं कर पाएंगे तो अपने खुद के बच्चों और अपने सामने पढ़ने वाले बच्चों को क्या शिक्षा देंगे। मुझे ये बात भी अच्छे से याद है कि प्रीति मैडम के लिए आपने बोला था कि उस से हमने माफ़ी मंगवा दी थी और रुला दिया था, ये बात मेरे स्वाभिमान को बचाने के लिए बार बार मुझे रोक रही है । पर मैडम, मैं अपने अहंकार को इतना बड़ा भी नहीं बनाना चाहती कि आपस के रिश्ते खराब हो। और वैसे भी स्प्रिचुअल बैकग्राउंड से हूँ, नाम जाप करती हूँ , नाम जाप करने वाले को किसी के प्रति भी ईर्ष्या और द्वेष नहीं रखना चाहिए, मेरी परवरिश और मेरी शिक्षा मुझे ये भी याद दिलाती है कि चाहे जो भी हो आप उम्र में मुझसे 2-3 साल बड़े हो। इसीलिए मुझे लगता है कि उस दिन चाहे किसी की भी गलती रही हो , छोटे होने के नाते मैं आपसे माफी मांगती हूँ, और बात को यही खत्म करना चाहती हूँ। आगे आप बड़ी हो जैसा उचित लगे माफ करना है तो इस मैसेज का रिप्लाई देना। आपकी सहकर्मी शताक्षी