virendra kumar dewangan 03 Oct 2023 आलेख दुःखद political 51950 0 Hindi :: हिंदी
चीन और पाकिस्तान के बाद कनाडा एक ऐसा देश बन गया, जो न केवल आतंकवादियों का पनाहगाह है, अपितु वह भारत के दुश्मन देशों की सूची में शुमार हो चुका है। चीन व पाकिस्तान फिर भी भारत के पड़ोसी मुल्क हैं, जो पूर्ववर्ती भारतीय हुक्मरानों की गलतियों व कमजोरियों का फायदा उठाकर जहां उसके हजारों किलोमीटर भूभाग को दबाए बैठें हैं और आतंकवाद का पोषण कर रहे हैं; वहीं कनाडा सात समुंदर पार भारत से हजारों किमी दूर बसता है और अपने मुल्क में खालिस्तानी उग्रवादियों का समर्थन करता है। गौरतलब है कि कनाडा में पनाह लिए खालिस्तानी आतंकी सरगना हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कनाडा में ही अज्ञात लोगों ने गोली मारकर कर 18 जून 2023 को कर दी, जिसका सीधा-सीधा आरोप वहां के प्रधानमंत्री जस्टिन टुªडो ने भारत पर लगा दिया, वो भी बगैर किसी सबूत व प्रमाण के। जब भारत ने इसका कड़ा विरोध किया और आरोप को बेतुका व निराधार बताया, तब कनाडा सरकार ने एक भारतीय राजनयिक को अपने देश से निष्कासित कर दिया। इसके जवाब में भारत ने भी एक राजनयिक को यहां से बोरिया-बिस्तर बांधने के लिए कह दिया। जवाबी कार्रवाई में दोनों देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। साथ ही, भारत ने कनाडा से आनेवाले नागरिकों को प्रतिबंधित कर दिया है। सच्चाई तो यह कि कनाडा में टुªडो की लिबरल पार्टी की सरकार हाउस आफ कामन्स के पिछले दो चुनाव 2019 एवं 2021 में अल्पमत में है। परिणामस्वरूप उनकी अल्पमत की सरकार पंजाबी मूल के खालिस्तानी समर्थक जगमीत सिंह धालीवाल के नेतृत्ववाली एनडीपी यानी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के 25 सांसदों की बैशाखी से चल रही है और इन्हीं के भारी दबाव में अलगाववादियों को खुश रखने के लिए फैसले कर रही है। दुष्परिणाम यह कि प्रधानमंत्री जस्टिन ने सोची-समझी रणनीति के तहत भारत पर दबाव बनाने के लिए झूठा आरोप उछाल दिया है। गौरतलब यह भी कि कनाडा में भीषण मंदी का दौर चल रहा है, उसकी जीडीपी निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिसको लेकर विपक्ष टुªडो सरकार पर निरंतर हमलावर है। इससे जस्टिन टुªडो की साख गिर चुकी है। वर्तमान में उसे 30 प्रतिशत कनाडाई ही पसंद करते हैं, जिसकी भरपाई वो दूसरे वर्ग को खुश करके करना चाहते हैं। कनाडा के प्रकरण में यह तथ्य भी सामने आया है कि पांच नाटो समूह के मुल्क, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, आस्टेªलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं, ने एक फाइव आई नामक खुफिया संगठन का गठन कर रखा है, जो एक-दूसरे मुल्क को खुफिया जानकारियां साझा करते रहते हैं। संभव है कि इन्हीं में-से किसी मुल्क के खुफिया अफसरों के द्वारा कनाडा सरकार को यह गलत जानकारी दी हो। इस संगठन के प्रति संदेह इसीलिए पुख्ता होने लगा है कि जो अमेरिका व ब्रिटेन आरंभ में तटस्थ थे, वे अब कनाडा के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। हों भी क्यों न? कनाडा आखिरकार नाटो का सदस्य देश जो है, वे नाटो मुल्क के खिलाफ कैसे जा सकते हैं? यह भी सच है कि निज्जर को भारत सरकार ने उसकी गतिविधियों के मद्देनजर आतंकी घोषित कर उस पर इनाम रखा था। अमेरिका ने भी उसे आतंकी घोषित कर रखा है। ऐसे और भी दर्जनांे अतिवादी हैं, जो कनाडा में शरण लिए हुए हैं। इस लिस्ट में प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फार जस्टिस’ के प्रमुख गुपपतवंत सिंह पन्नू और उसके साथी भी शुमार है। एक विश्वस्थ सर्वे के मुताबिक जबकि 99 फीसद से अधिक सिख भारत के साथ भारतीय बनकर रहना चाह रहे हैं। इसका आशय यह भी कि ऐसे सिख मुट्ठीभर हैं, जो अलगाववाद को न सिर्फ हवा दे रहे हैं, बल्कि उसका पोषण भी कर रहे हैं। जैसा कि पाकिस्तान भारत के साथ छलावा करता रहा है और भारत के गुनेहगारों को पनाह देता है, वैसा ही काम कनाडा सरकार छल-बल के साथ कर रहा है। कनाडा में शरणागत ये अतिवादी जहां मंदिरों को निशाना बनाते हैं, हिंदुओं को डराते हैं और उनका जीना मुहाल करते हैं; वहीं वे कनाडा सहित अन्य मुल्कों के दूतावासों व वाणिज्यिक संस्थाओं पर हमले करते हैं, उनके अधिकारियों व कर्मचारियों को धमकाते हैं विचारणीय यह भी कि किसी देश का घोषित आतंकवादी जब किसी अन्य देश में शरण पाता है, तब उस देश का कर्तव्य बनता है कि या तो उसकी चरमपंथी गतिविधियों पर रोक लगाई जाए या उसको पकड़कर उस देश के हवाले किया जाए, जिसके खिलाफ साजिश रची जा रही हैं। लेकिन, सत्ता की राजनीति ऐसी है, जो जाने-अनजाने आतंकवाद को बढ़ावा देती है, जो मानवता का सबसे बड़ा शत्रु है। जब अमेरिका अपने देश के दुश्मन ओसामा बिन लादेन को 2011 में पाकिस्तान के एटमाबाद से उठा सकता है; अफगानिस्तान के काबुल में शरण पाए अल जवाहिरी को 2020 में मार सकता है और ईरान में ड्रोन हमलाकर कर जनरल कासिम सुलेमानी को 2022 में निपटा सकता है, तो भारत को भी ऐसा कुछ साहसिक कदम उठाना चाहिए और पाकिस्तान व कनाडा में देश के खिलाफ साजिश रच रहे आतंकवादियों का काम तमाम कर देना चाहिए। --00-- अनुरोध है कि पढ़ने के उपरांत रचना/लेख को लाइक, कमेंट व अधिकतम शेयर जरूर कीजिए। --00-- सुधी पाठकों से अनुरोध है कि वे लेखक के द्वारा सृजित कहानियों व धारावाहिकों का आनंद लेने के लिए प्ले स्टोर के माध्यम से ‘‘प्रतिलिपि एप’’ डाउनलोड कर सकते हैं और उसमें ‘‘वीरेंद्र देवांगन’’ सर्च करके लेखक की तमाम रचनाओं को पढ़कर समीक्षा में बता सकते हैं कि उसमें रोचकता है या नहीं। --00--
लेखक-परिचय लेखक शासकीय सेवा से सेवान�...