Shubham Kumar 30 Mar 2023 आलेख समाजिक चित्रकला एक महान विद्या 58344 0 Hindi :: हिंदी
चित्रकला एक महान विद्या है,, हम इस विषय पर आज चर्चा करेंगे,, हिंदू धर्म में ऐसी बहुत सी कलाकृतियां भरी पड़ी है, जिनमें से मूर्तिकला बेस्ट है, चित्र कथा, को चित्रकला कहते हैं,, जैसे एक दुखियारी मां है, और उसका दर्द और उसकी ममता, इस बात को व्यक्त करने के लिए, इस भावना को लोगों में डालने के लिए, दो रास्ते हैं, पहला हम शब्दों के जरिए, उसे कागज पर लिख सकते हैं, या बोल सकते हैं, लेकिन चित्रकला के_ कुछ ऐसे ही महत्व है, वह इन बातों को बहुत ही सरल तरीके से समझा देता है, उन भावनाओं को हमारे अंदर व्यक्त कर सकता है,, उसे हम चित्रकला कहते हैं,, और किसी धर्म में ,चित्रकला जैसी महान विद्या को, तो हमने नहीं देखा, लेकिन हिंदू धर्म में, इन महान विद्याओं का उल्लेख मिलता है,_ चित्र का प्रभाव मनुष्य के ऊपर, बहुत हद तक पड़ता है, लगभग 80% और 20% हमारी वाणी से मनुष्य आकर्षित होते हैं, इस जगत में , दो तत्व सत्य है, छवि का होना, और वाणी का होना, हर चीज का एक अपना आकार होता है,, एक अपना छवि होता है, एक वाणी होता है,, जैसे हम किसी भावनाओं को, किसी के अंदर, बोलकर डाल सकते हैं,, या चित्रों के जरिए_ 1905 में_ अवनींद्र नाथ, ने भारत माता की चित्र का अंकन किए थे, उस समय अनेक लोग, उस मातृभूमि के ऊपर, आकर्षित हो रहे थे, यह इतना लोकप्रिय हो गया कि,, आज भी लोग जब भी भारत माता को, अपनी जन्मभूमि को, याद करते हैं तो, कुछ ऐसा ही छवि, हमारे मानस पटल पर पड़ता है, जिसका लाभ यह हुआ के, बहुत से लोग देश को आजाद करने के लिए, आंदोलन में सहभागी हो गए,, सर्वप्रथम हमारे जन्मभूमि, का तस्वीर जिन्हें, हिंद देवी, का नाम दिया गया, जिनका निर्माण एक शिक्षक मगनलाल शर्मा ने की थी- सन 1306 ईस्वी को, वह अहमदाबाद के निवासी थे, यह चित्र इतना लोकप्रिय हो चुका, की क्रांतिकारियों, को समझाने के लिए, मानो एक हथियार मिल गया हो,, आज भी हमारे दुनिया में, जो बर्बादी हो रही है,, उनमें से कुछ, अश्लील चित्रों का होना है,, पहले के समय में लोग, अपनी भावनाओं को, या वाक्यों को, सुंदर रूप देने के लिए, चित्रों का निर्माण या मूर्तियों का निर्माण किया करते थे,, यह उनकी कला होती थी, यह एक विद्या, होती थी,, आज लोग मूर्ति पूजा, यह मूर्ति के विषय में अनेकों सवाल उठाते रहे हैं,, उदाहरण के तौर पर, हम आपसे कहते हैं, आप अपनी मां का ध्यान करें, जिसने आप को जन्म दिया है, तो जब आप ध्यान करेंगे, तब देखेंगे कि, हमारे अंदर, एक औरत का तस्वीर बनता है, वहां पर एक पुरुष का तस्वीर बनता है,, तो आप कहेंगे नहीं, का कभी जानने की कोशिश करते हैं, ऐसा क्यों नहीं होता, या कभी भी किसी तस्वीर में, पुरुष का चित्र बनाकर, बताया जाता है यह तुम्हारा मां है, तो आप कहेंगे नहीं, तो आप समझ सकते हैं,, हमें पता है हमें कभी भी, इन विद्याओं के बारे में ठीक ठीक से, पढ़ाया नहीं गया, हमें इस बात का बेहद अफसोस है,, लेकिन मैं हिंदू धर्म जैसी महान संस्कृति, को लाख-लाख धन्यवाद देता हूं,, जो चित्रकला जैसी विद्या, को अपने आप में सिमट कर रखी है,, जैसे मैं यहां पर एक वाक्य लिखने जा रहा हूं, एक छोटी सी उदाहरण या उल्लेख कर रहा हूं__ ईश्वर दयालु है, और बलवान है, और रूपवान है, और उनके अंदर ममता है, और वह सब का पालनहार है,, उनमें से एक चित्र है_ भगवान श्री कृष्ण, उनके कोमल नयन और श्याम वर्ण है, उनके मुख में समस्त ब्रह्मांड है, और उनकी हाथों में एक बांसुरी है, इस प्रकार मूर्ति, और चित्र, का मानस पटल पर, एक ऐसा प्रभाव होता है कि, मनुष्य उसके पास खिंचा चला जाता है,, और मन भक्ति में झूम उठता है,,
Mujhe likhna Achcha lagta hai, Har Sahitya live per Ham Kuchh Rachna, prakashit kar rahe hain, pah...