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बड़ते मनुष्य की सहजता

Ashok prihar 10 Apr 2023 आलेख दुःखद Youtube/google/yahoo/bing 16267 0 Hindi :: हिंदी

अखंडिय शब्दों की वो  प्रभाता है
जो शब्दों में बया नहीं हो सकती!  
व्याकुलता मनुष्यो को उलझाने का प्रयास करेगी!
 वह' जिज्ञासा मनुष्य को उलझा कर रख देगी! 
मैं परिपक्वता की इस उम्र की ओर इशारा करते हूं, 
जो एक साधारण बच्चे को  प्रेम के बहाने बर्बाद कर देती हैं,  
या फिर लक्ष्य को पाने के बाहने बच्चे को बहुत सफल बना देती है!


रूप रंग श्रृंगार से तूने बांधा शरीर ! 
कोई होवे मती निर, पाजै जीवन करिर!!

कठिन शब्द:-  मती:-विवेक,पाजै:-कम इस्तेमाल,करिर:-बर्बाद
     अर्थ: 
             मनुष्य सुंदर दिखने के लिए खुद को आकर्षक बनाता है तथा शरीर को विभिन्न प्रकार के श्रृंगार से निहारता है साथ ही पश्चिमी संस्कृति की वेश-भुषा का अनुसरण करता है, पंरतु उसका यह सौंदर्य  क्या काम का यदी उस में विवेक नहीं है ! यदि आप कम सुंदर हो चलेगा'! और यदि आप अपने विवेक का उचित इस्तेमाल नहीं करते तो जीवन बर्बाद हो जाएगा!                                     Writer  :-                                                                                     
                    Ashok prihar

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