दुःखद रचनाएँ

नवीनतम दुःखद रचनाएँ

gareeb tha fakeer tha kalandar tha bo
gareeb tha fakeer tha kalandar tha bo

गरीब था फकीर था कलन्दर था वो जो भी था दिल का सिकंदर था वो न नदी था न पोखर था न दरिया था दूर तलक़ फैला हुआ समंदर था वो

मेरे दिल का कोरा पन्ना अधूरा रह गया
मेरे दिल का कोरा पन्ना अधूरा रह गया

मेरे दिल का पन्ना कोरा रह गया, कभी भरा नहीं रंग बेरंग रह गया, किया था सच्चा प्यार फिर भी अधूरा रह गया।

दूरियाँ
दूरियाँ

दिल में प्यार दरमियाँ दूरियाँ रख दी ! पाक रिस्तो के बीच मजबूरियाँ रख दी !! बात समझने के लिए कुछ, भी नहीं ! जिंदगी के त

उम्मीद
उम्मीद

क्यों देखते हैं तुम्हारी राह जब तुम्हे पाने तक की उम्मीद नहीं

कविता, कब मिलेगा पीडित नारी को इंसाफ।
कविता, कब मिलेगा पीडित नारी को इंसाफ।

ना मानवता का रहा मान। जहाँ इंसानियत हो शर्मशार। आये दीन होते हैं बलात्कार। कब रूकेगा ये जधंय अपराध। कब तक होगा म

Jab se tu is dil se dur ho gya
Jab se tu is dil se dur ho gya

Jab se tu is dil se dur ho gya ,dil mera chaknachoor ho gya,bikhr gye sare sapne, jinda rahna muskil ho gya.

Tere gum mai hum pagal ho gye
Tere gum mai hum pagal ho gye

Tere gum mai hum pagal ho gye,koi khabr na rahti h apni ,khud se itne begane ho gye.

दौर
दौर

गुज़रते हरेक ज़माने से गुजरा हूँ मैं कभी हौसलों में ज़ोर था यादें आती हैं मीठी मीठी सी वो वक़्त नहीं बिखरता दौर था न

दर्द भरी शायरी, उसकी याद मे
दर्द भरी शायरी, उसकी याद मे

कौन कहता है कि हम एक ही मरते है। अपने को खोकर . देखो हम कितना तड़पते है ॥ विरह की अग्नि मे जलते हैं और आहे भरते है । ख

उधड़े धागे
उधड़े धागे

वो उधड़े धागे उन रिश्तों के है जहाँ गांठो की गुंजाइश कम है ज़िन्दगी के दरिये का गोताखोर हु यहाँ बचे रहने की फरमाइश

aaino par dag ki sifarish na kar
aaino par dag ki sifarish na kar

आईनों पर दाग की सिफारिश ना कर तू बेवजह आग की सिफारिश ना कर मैं तुझे जन्नत बसाकर दे सकता हूँ पर उजड़े हुए बाग की सिफ

नारी
नारी

🌺नारी🌺 हर गम को यूं तेरा सहती रहना भी ठीक नहीं हर घर की मर्यादा है तू फिर तेरा यूं मरते रहना भी ठीक नहीं हर परिवार

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