नवीनतम दुःखद रचनाएँ

ह्दयगम
Raj Ashok singh
खामोश थे ,शब्द उसके छाई थी! उदासी ,सी पास बैठ थे! हम भी, पर उसे ,पता नहीं ! ये क्या कोई दर्द था , या दिल्लगी तब से हम भी,
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Date:
06-10-2022
Time:
07:13
हमदर्द
Kirti singh
कहते है एक दूसरे का हमदर्द बनने से दर्द कहीं छुप जाता है मगर अमीरों की चार दीवारों में सिर्फ मैं होने से हम कहीं गुम
40
Date:
06-10-2022
Time:
07:07
आत्महत्या से पहले रुके
Kirti singh
रुको ठहरो जिंदगी कहती है हमसे एक मोड़ पर जब सामने आते हैं हमारे जिंदगी के तीन रास्ते, यह तीन रास्ते मौत दर्द भरी जिं
86009
Date:
06-10-2022
Time:
06:48
माँ भाग 2
Pinky Kumar
माँ की जगह इस दुनिया में कोई भी नहीं ले सकता माँ का दिल एक विशाल समुद्र की भाती होता है। जिसमे अच्छा बुरा सब अपने अन्
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Date:
06-10-2022
Time:
06:53
क्यों तुझे जिंदगी
Ranjana sharma
क्यों तुझे जिंदगी रहम न आई हम पे ऐसी ठोकर तूने लगाई कि चोट बहुत गहरी खाई हम ने। धन्यवाद
79155
Date:
06-10-2022
Time:
06:57
बड़े - बड़े वादें
Ranjana sharma
कल तक जो मेरे साथ बड़े - बड़े वादें करते थे आज मुंह मोड़ के ऐसे चल दिए जैसे हमें कभी जानते ही नहीं थें। धन्यवाद
4086
Date:
06-10-2022
Time:
07:10
सासे भी रुक के चलती है......
Karuna bharti
सासे भी रुक के चलती है दिन भी ठहेर कर चलता है जिन्दगी भी खुशियों मोहताज हो गई है ऐसे तुम बिन गुजारा हो गया है ✍✍💘💘💔
77895
Date:
06-10-2022
Time:
05:45
💐कविता💐 👌सन्तोष बेच तृष्णा खरीदी, देखो कितनी मंहगाई है।👍 💐*******प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर.... करण सिंह*👌 *******
Karan Singh
***************************************** 💐कविता💐 👌सन्तोष बेच तृष्णा खरीदी, देखो कितनी मंहगाई है।👍 💐प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर.... करण
4083
Date:
06-10-2022
Time:
06:25
हम कलियुग के प्राणी हैं
शिवराज आनंद
सतयुग, त्रेता न द्वापर के, हम कलयुग के प्राणी हैं। हम- सा प्राणी हैं किस युग में ? हम अधम देह धारी है
77835
Date:
06-10-2022
Time:
06:36
तिनका तिनका
Ranjana sharma
तिनका - तिनका जोड़ के मैंने बनाया था अपना एक घरौंदा एक पल में ही टूट गया कितना कमजोर था मेरा घरौंदा। धन्यवाद
75641
Date:
06-10-2022
Time:
06:56
दूसरों का दर्द समझना
Chanchal chauhan
किसी को किसी अपने से दूर ना करना बड़ी तकलीफ होती है, हर किसी का दर्द समझना, दुःख ना देना किसी को, क्योंकि वहां इंसानि
73956
Date:
06-10-2022
Time:
05:49
पन्ने पन्ने पर लिखी दासता
Chanchal chauhan
पन्ने पन्ने पर लिखी अपनी दास्तां, पर कोई पढ़ ना पाए, चेहरे पर दिखावटी हंसी थी, मन का ग़म कोई देख ना पाये।
73940
Date:
06-10-2022
Time:
06:56