नवीनतम राजनितिक रचनाएँ

कविता (सत्ता )
Sunil suthar
सत्ता... (कविता ) 1.कागज छुती न कलम उठाती,है इसे कुर्सी पर बैठे रहने की बिमारी, 2.हां...है अंधी ,गूंगी, बहरी और लंगङी,है इ
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Date:
06-10-2022
Time:
03:03
उठो धरा के वीर सपूतों
Ambuj Pandey(Aru)
बहुत हुआ स्वागत सम्मान अब आवाज उठानी है गलत नही हो सत्ता का उपयोग हमने मन मे ठानी है।। जागो हे नौजावानों रड़ सजाओं औ
74303
Date:
06-10-2022
Time:
04:22
*प्रेरणादायक कहानी* *👌पात्र की महिमा* 👍💐💐सपनों का सौदागर..... करण सिंह💐💐
Karan Singh
*प्रेरणादायक कहानी* *👌पात्र की महिमा* 👍💐💐सपनों का सौदागर..... करण सिंह💐💐 👇👇👇 *यह घटना मगध की है। मगध के एक छोटे से र
72000
Date:
06-10-2022
Time:
03:16
# नशा मुक्ति अभियान.......
चिन्ता netam " मन "
समसामयिक व्यंग रचना...... # नशा मुक्ति अभियान ..... कहीं कार्यक्रम था नशा मुक्ति का इसे छोड़ने की , अचूक युक्ति का .....! म
69667
Date:
05-10-2022
Time:
22:02
बहुजन
Amit kumar
बहुजन ************************ 💐💐💐💐💐💐💐💐 *************************** डर -डर कर तुम मत जिओ तुम ही तो बलवान हो, तुम्हारे पूर्वज बलशाली है| ऐसे
65828
Date:
06-10-2022
Time:
06:00
भ्रष्टाचार खत्म करों
कविता केशव
बच्चे से लेकर, अस्सी साल के बुड्ढे तक, बन बैठा हर कोई भ्रष्टाचारी, बच्चा पैदा होने से लेकर अर्थी के कफ़न तक, चलती
62542
Date:
06-10-2022
Time:
05:40
# दिल्ली होगा कब्जे में ......
चिन्ता netam " मन "
# दिल्ली होगा कब्जे में..... इधर-उधर सिर हिलाते बड़ी अदा से हाथ मटकाते , करते दो टके की नेतागिरी देते हैं झूठे आश्वास
52186
Date:
06-10-2022
Time:
06:12
राज नैतिकता कहा गई
Rupesh Singh Lostom
प्रजा तंत्र पराजित लोकतंत्र के अनोखी अलौकिक उन्मूलन से लोकतान्त्रिक अधिकार का हो रहा खूब फायदा कुछ भी बोलो क
51371
Date:
06-10-2022
Time:
06:23
मज़हबी ज़हर बोना ही जिसका धंधा है
Trishika Srivastava
मज़हबी ज़हर बोना ही जिसका धंधा है वो कोई पुजारी नहीं, सियासत-दाँ है इनकी ख़ातिर जो झगड़ रहा आपसदारी में सच पूछिये त
51061
Date:
06-10-2022
Time:
05:40
हमने बाजी ही पलट दी
Karuna bharti
एक- एक कर, हमने बाजी ही पलट दी वक्त मेरे करीब आया, और मे वक्त के करीब पहुँच गई ✍✍✍✍💘💘💘💘
52281
Date:
06-10-2022
Time:
06:28
# तेल लगा के .....
चिन्ता netam " मन "
# तेल लगा के ...... वो तो आए हाथ जोड़कर , हाथ खोलकर चले गए उनकी तो हो जब भी इच्छा , गिरगिट के रंग बदल गए ...! ऐसे ही ये बदल गए ,
50794
Date:
06-10-2022
Time:
06:29
# देशद्रोही / देशभक्त ...
चिन्ता netam " मन "
# देशद्रोही/देशभक्त... धार्मिक राजनीतिक, समाजिक या सरकारी हो ... कोई अमीर हो या चाहे वो कोई भिखारी हो ... अन्य किसी
52261
Date:
06-10-2022
Time:
06:12