राजनितिक रचनाएँ

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मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ
मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ

जालिमों की हिरासत मे जलता हूँ अपने घर,अपनी रियासत मे जलता हूँ तुम मुझे पहचानते हो ऐ दुनियाँ जहाँ वालो मैं फिलीस्त

* वादा-खिलाफी *
* वादा-खिलाफी *

#समसामयिक ** वादा-खिलाफी ** हाथ में, गंगा जल को लेकर, बंद करने का, वादा को कर, यह चीज खराब । सत्ता की सरकार दुकान म

साफ़ साफ़ कह दो
साफ़ साफ़ कह दो

साफ़ साफ़ कह दो हमारे देश के हालात बदले वाले नहीं साफ साफ कह दो क्यों इतना घुमाते हो क्यों अपनी रणनीति में हमें फ

डाका
डाका

सपने दिखाकर हमको ! नींदो पे डाका डाला !! बातों की देके रोटी ! खा गए हमारी बोटी !! देखी है इनकी रहमत ! ऐसी है इनकी ख़िदमत !!

यह कविता राबड़ी देवी के बिहार मुख्यमंत्री के शासन काल की हैं जो मैं अब आप लोगों के बीच में लेकर आ रहा हुँ जंगल राज
यह कविता राबड़ी देवी के बिहार मुख्यमंत्री के शासन काल की हैं जो मैं अब आप लोगों के बीच में लेकर आ रहा हुँ जंगल राज

कहीं अश्क कहीं क्रंदन कहीं घर बने श्मशान! राबड़ी के राज में हुआ जंगल राज! कैसी यह हवा चली! कुम्हलाया है हर तरुण-कुच

खेल है
खेल है

ज़मीन पर यह चलते हैं ! आसमानी बातें करते हैं !! अल्फाज़ो में रखते दम हैं ! बेशक नंग हैं !! देश की शान हैं ! चाहे कितने ही

हमारे देश की दयनीय स्थिती क्यो है?
हमारे देश की दयनीय स्थिती क्यो है?

बेरोजार युवा अपने हाथो में डिग्री लेकर जब सड़को पर घूमते नजर आते ।है । तब पता चलता है कि आखरी हमारे देश की इतनी दयनी

"सरकारों द्वारा ठगा जाता हूँ बेरोजगार कहलाता हूँ"
"सरकारों द्वारा ठगा जाता हूँ बेरोजगार कहलाता हूँ"

दिन-दोपहरी कन्धों पर बोझा लेकर में गाँव से शहर को आता हूँ, मेरी बचपन की ना जाने कितनी विरासत में गाँव छोड़कर आता हूँ,

सत्ता की मदांधता
सत्ता की मदांधता

सत्ता की मदांधता केंद्रीयमंत्री नारायण राणे को उसके घर से खाना खाते वक्त गिरफ्तार करवाना और विभिन्न थानों में

ऐसी की तैसी - अबकी बार, हमारी सरकार
ऐसी की तैसी - अबकी बार, हमारी सरकार

आज सुबह मैं अपने पापा के साथ बाज़ार से लौट कर आ रहा था कि तभी एक आदमी ने पास में आकर बाइक रोकी और पापा के पैरों पर गिर पड़

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