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प्रकृति अनुपम कृति हैं।
RANJEET KUMAR
प्रकृति अनुपम कृति हैं, यह इसकी पहचान है। कहीं पेड़ों की छांव में, पक्षी बैठे शान्त से कहीं अपनी चोंच खोले, ध्वनि कर
37661
Date:
24-05-2022
Time:
23:45
शीर्षक (पिता)
SACHIN KUMAR SONKER
शीर्षक (पिता) मेरे अल्फ़ाज़ सचिन कुमार सोनकर माँ का प्यार तो तुमको याद रहा। क्या पिता का प्यार तुम भूल गये। एक पिता क
37676
Date:
24-05-2022
Time:
23:32
सादगी
Swami Ganganiya
एक बार एक व्यक्ति ने मुझसे कहा कि चलाकी जरूरी है। चालाक बनो सीधे-साधे रहोगे क्या मिलेगा। कुछ ना मिलेगा पर वह यह ना ज
36999
Date:
25-05-2022
Time:
00:16
शीर्षक (महामारी कोरोनावायरस)
SACHIN KUMAR SONKER
शीर्षक (महामारी कोरोनावायरस) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) एक आपदा ऐसी आयी सारी दुनियाँ चीख़ी चिल्लाई। चारों तरफ़
34247
Date:
24-05-2022
Time:
23:45
ख्वाब
Swami Ganganiya
ख्वाइशों से बढकर जो मिले उसका कोई किनारा नही होता। चाहे सपना कुछ भी हो जो हकीकत मे हमें ना मिले वो हमारा नही होता।
34248
Date:
25-05-2022
Time:
00:19
मैं जिन्दगी के मसले हल
Swami Ganganiya
मैं जिन्दगी के कुछ मसले हल करना चाहता हूँ। मैं जिन्दगी के बीते हुये पल फिर से जीना चाहता हूँ। फासले कितने भी हो म
32916
Date:
24-05-2022
Time:
22:35
सब अपने अंदर ही नजर आता है
REETA KUSHWAHA
अंदर का सबेरा ,जब जाग जाता है बाहर का दिन भी, तब रात नजर आता है कहीं कुछ भी नही है, इस भीड़ भरी दुनिया में हम जागें, तो स
32909
Date:
25-05-2022
Time:
00:35
मन चाहे चिड़िया हो जाऊं
REETA KUSHWAHA
मन चाहे चिड़िया हो जाऊं दूर दूर नदियों में जाऊं शीतल अमृत में चोंच डुबोऊ स्वर्ण रेत पर ठुमक ठुमक इतराऊ मन चाहे चिड
32882
Date:
24-05-2022
Time:
23:25
मत छूओ छाया को
Ajeet
मत छूओ छाया को अब बिखर जाने दो/ इन काले बादलो को आसमान में उड़ जाने दो, मत छूओ छाया को अब बिखर जाने दो/ तिन - तिन बिखरत
32075
Date:
25-05-2022
Time:
00:25
अब आगाज यहां
Vishnu shankar tripathi
प्रकृति किलेबंदी नदी नहरो से वो सिंह द्वार है मैं यहीं का हूं नहीं शिखरो से है अभिनंदन करने दो शेर खड़े कोयल गात
32059
Date:
24-05-2022
Time:
23:19
पहचान ही क्या
Swami Ganganiya
जो पहले ही कदमो में लडखडा जाये वो चाल ही क्या ? जो तेज भी दौडे और मंजिल तक न पहुँचे वो रफ्तार ही क्या ? जो चहरा देखकर म
32109
Date:
24-05-2022
Time:
23:02
शीर्षक (माँ की ममता )
SACHIN KUMAR SONKER
शीर्षक (माँ की ममता) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) इस धरती पर जब मै आया गोद मे त
32077
Date:
24-05-2022
Time:
22:55