वे सभी - Ranjana sharma

वे सभी     Ranjana sharma     शायरी     समाजिक     2022-10-06 04:33:46     Google     72447           

वे सभी

रिश्तों की डोर से बंध कर रह जातें हैं
वे सभी
जो जख्म खा के भी मुस्कुराते हैं
और उफ़ न निकलती उनके मुंह से कभी।
             धन्यवाद

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