ईमान बेच चुके हैं - Trishika Srivastava

ईमान बेच चुके हैं     Trishika Srivastava     शायरी     समाजिक     2021-09-22 11:07:57     ईमान बेच चुके हैं     7107        
ईमान बेच चुके हैं

ईमान बेच चुके हैं, न जाने किस लाचारी में
खड़े हैं दो-चार, उस मक्कार की तरफ़दारी में
जिधर मिले मुनाफ़ा , उधर ही ढुनक जाते हैं
दो-चार बैंगन ऐसे भी हैं, मेरी रिश्तेदारी में

— त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’
कानपुर (उ.प्र.)

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