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अपने लेख प्रकाशित करें     Sahity Live     महत्वपूर्ण सूचनाएँ     साहित्य लाइव सूचनाएँ     2021-09-22 10:15:00     Publish Articles, How to publish articles, publish hindi articles     107        
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भक्ति गीत
भक्ति गीत

समपिर्त ए जीवन हमारा तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा क्षमा करके मेरे हर भूल चरणों मे खिलने दो हमें बन

दया सब पर करना
दया सब पर करना

दया सब पर करना किसी का आशियाना ना उजड़ जाये, कृपा सब पर करना किसी की नैया बीच भंवर में डूब ना जाये।

मेरे यार - मेरे लिए मेरी दुनिया मेरे यार है
मेरे यार - मेरे लिए मेरी दुनिया मेरे यार है

मेरे लिए मेरी दुनिया मेरे यार है जिनके बिना मेरा हर एक पल बेकार है क्यों छोड़कर आया में तुम्हे परदेश जहां तुम नही स


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इच्छा_ शक्ति - संदीप कुमार सिंह | कविताएँ | Sahity Live

इच्छा_ शक्ति - संदीप कुमार सिंह

इच्छा_ शक्ति     संदीप कुमार सिंह     कविताएँ     समाजिक     2021-09-22 10:15:00     लोगों के लिए प्रेरणा से भरपूर मेरी कविता जिसका शीर्षक ऊपर दिया हुआ है।     107        
इच्छा_ शक्ति

शक्ति जब मिले इच्छाओं की,
जो चाहें सो हांसिल कर कर लें।
आवश्यकताएं अनन्त को भी,
एक हद तक प्राप्त कर लें।
शक्ति जब मिले इच्छाओं की,
आसमान पर भी अपनी दुनिया बसा लें।
जीवन की इस डगर में,
बाधाएं बहुत सारी हैं।
पर मेरे दोस्तों घबराना नहीं है,
इच्छा रूपी अपने इस खजाने पर,
सदैव हमें विश्वास रखना है।
मुझे ये करना है_मुझे वो करना है,
करना है तो करना है।
असम्भव को भी सम्भव करना है,
जीवन एक जंग है,
जीवन जंग में मुझे जीतना है।
तर्क और वितर्क, युक्ति और सूक्ति,
विज्ञानिक इस काल में,
नई_नई अविष्कार करना है।
सारे अपने सपनों को,
सकार करना है।
शक्ति जब मिले इच्छाओं की,
जो चाहें सो हांसिल कर लें।
                     चिंटू भैया

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इच्छा _शक्ति - संदीप कुमार सिंह | कविताएँ | Sahity Live

इच्छा _शक्ति - संदीप कुमार सिंह

इच्छा _शक्ति     संदीप कुमार सिंह     कविताएँ     समाजिक     2021-09-22 10:15:00     लोगों के लिए प्रेरणा से भरपूर मेरी कविता जिसका शीर्षक ऊपर दिया हुआ है।     107        
इच्छा _शक्ति

इच्छा शक्ति
🥀🥀

शक्ति जब मिले इच्छाओं की,
जो चाहें सो हांसिल कर कर लें।
आवश्यकताएं अनन्त को भी,
एक हद तक प्राप्त कर लें।
शक्ति जब मिले इच्छाओं की,
आसमान पर भी अपनी दुनिया बसा लें।
जीवन की इस डगर में,
बाधाएं बहुत सारी हैं।
पर मेरे दोस्तों घबराना नहीं है,
इच्छा रूपी अपने इस खजाने पर,
सदैव हमें विश्वास रखना है।
मुझे ये करना है_मुझे वो करना है,
करना है तो करना है।
असम्भव को भी सम्भव करना है,
जीवन एक जंग है,
जीवन जंग में मुझे जीतना है।
तर्क और वितर्क, युक्ति और सूक्ति,
विज्ञानिक इस काल में,
नई_नई अविष्कार करना है।
सारे अपने सपनों को,
सकार करना है।
शक्ति जब मिले इच्छाओं की,
जो चाहें सो हांसिल कर लें।
                       चिंटू भैया
                         🥀🥀
                       

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पिता की उलझन - Mansi | कविताएँ | Sahity Live

पिता की उलझन - Mansi

पिता की उलझन     Mansi     कविताएँ     अन्य     2021-09-22 10:15:00     पिता की उलझन     107        
पिता की उलझन

एक पिता द्वारा दी गयी सबसे खूबसूरत कविता:-

किसी ने सोना ,
किसी ने चांदी,
किसी ने सारी दौलत दे दी,
हमने उनका घर बसाने के लिए 
अपने घर की रौनक दे दी।

कोई बहुत रोया ,
किसी ने बहुत कुछ खोया,
पर इस संसार ने उसे समझा ही दिया
"बेटी पराया धन होती है"
आखिर उसे सीखा ही दिया।

अब याद करके बेटी को,
एक मजबूर पिता
कुछ इस तरह दुख छुपाता है,
कभी हंसता है,
कभी रोता है,
और बेटी का सुख ही मांगता है।।

                                                           -मानसी

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लो फिर उठा दी मैंने कलम लो फिर उठा ली मैंने कलम। जैसे घर के होते काम अनेक नहीं मन करता कि उठाऊं मैं कलम। ‌‌‌‌

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"आंतक से सामना एक वतन का खात्मा " - | कविताएँ | Sahity Live

"आंतक से सामना एक वतन का खात्मा " -

"आंतक से सामना एक वतन का खात्मा "         कविताएँ     धार्मिक     2021-09-22 10:15:00     5000     107        
"आंतक से सामना एक वतन का खात्मा "

वह दारूण दर्शय देख- देख कर आंखे नम हो रही है,
मेरे दिल में उनके लिए दया की लहरें उमड रही है,
कल तक थे जो आजाद परिंदे वो आज गुलामी में जकड रहे है,
अपनी आजादी पाने को अपना वतन छोड़ रहे है।।
कुछ आतंकी हुऐ इकट्ठे ओर उनका सब कुछ उन से छीन लिया, 
कल तक थे जो आसंमा में आजाद परिंदे आज उन आतंकीयों ने उनके परों को भी कतर दिया,
कुछ लोगों ने जब भरी उडान आजादी की तो उनको मौत के घाट उतार दिया, 
कुछ लोगों की सोच ने आज एक वतन का कत्ले आम किया ।।
जब देखता हूँ वह दर्शय मैं तो आंखे भर आती है,
उस माँ की बेबसी जो अपनी बच्ची को फेंककर उसके जीने की भीख मांगती है,
आतंकी आते है घर में ओर माँ-बहिनों की जबरन आबरू लूट कर ले जाते है, 
अपनी आंतकी दुनिया के जुर्म वाले कानून उन पर तोफ जाते है।।
नयनों से वह दर्शय देखकर अश्रु की जल धारा निकल रही है,
उन आतंकीयों के जुर्म से बचने को वहाँ की जनता अपने वतन को छोड़ रही है,
कुछ इंसानों की आज इंसानियत कत्ले आम हो रही है,
उन आतंकीयों के जुर्म से आज उस वतन की धरती छलनी हो रही है,
एक वतन की जमीं आज खुले आम नीलाम हो रही है।।

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" माँ का प्यार " - | कविताएँ | Sahity Live

" माँ का प्यार " -

" माँ का प्यार "         कविताएँ     अन्य     2021-09-22 10:15:00     5000     107        
" माँ का प्यार "

ममता की तू अजब दुलारी प्यार में तू न्यारी है,
इस दुनिया में माँ तू मुझको सबसे ज्यादा प्यारी है,
तेरी प्यारी छाँव में मुझे दुख-दर्द कुछ नहीं होता है, 
तुझ से पल भर दूर रहूँ तो माँ मुझे यह संसार फीका सा लगने लगता है।
रिश्ते, मर्म,प्यार की गजब निशानी माँ तू अरमानो का सागर है,
मेरे प्यारे से इस मुखडे की माँ तू ही तो एक निशानी है,
अरमानो को पाने के लिए शहर को मैं निकला हूँ, 
तेरा प्यार नहीं है मेरे पास निज इस दुख को सहता हूँ ।
होटलों की रोटी मे जब स्वाद मुझे नहीं आता है,
तेरे प्यारे हाथों की रोटी का वह गस्सा याद मुझे हमेशा आता है,
अपने दुख-दर्द का तू कभी दिदार नहीं करती,
माँ तू मुझे कभी किसी चीज के लिए इंकार नहीं करती ।
राम, क्रष्ण, महावीर भी तेरी गोदी मे खेले है,
इस दुनिया के हर भगवान की मूरत में माँ मैंने तेरे चहरे देखे है।

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हर जगह तो धुआँ नहीं होता - आकाश अगम | कविताएँ | Sahity Live

हर जगह तो धुआँ नहीं होता - आकाश अगम

हर जगह तो धुआँ नहीं होता     आकाश अगम     कविताएँ     अन्य     2021-09-22 10:15:00     #मुक्तक #क़तआत #शिकार #हिंदी कविता #दवायफ़ #ज़िन्दगी #तुम्हारी याद आती है #शेर #मोर #मेरे पापा #mere papa #davayaf #zism #raat #shayar #रात #नियम #आकाश अगम #कागज़ #चाँद #zindgi #थपेड़े #कर्तव्य #रागिनी #     107        
हर जगह तो धुआँ नहीं होता

राह में जो मिले कहूँ उससे
मैं तुझे ही तो प्यार करता हूँ
जो किसी के शिकार बन बैठे
मैं उन्हीं का शिकार करता हूँ।।

जब दया ख़त्म हो मेरे भीतर
मैं  ग़रीबी  उधार  लेता  हूँ
कौन मेरी है जानने के लिए
हाथ सब पर ही मार लेता हूँ।।

मोर हूँ नाचता नहीं लेकिन
दर्द तो है कहा नहीं लेकिन
फल निकल आ गए फली मेहनत
मैं उसी दिन रहा नहीं लेकिन।।

शायरों को फिर और क्या दिखता
दर्द   का   आसमां   नहीं    होता
अश्क़ बहने का क्या बहाना दूँ
हर जगह तो धुआँ नहीं होता।।

हृदय के द्वार करके बन्द हमको कर पराया
न जाने क्या मिला इतना अहं चढ़ने लगा है
मैं कितना भी घुमाऊँ वो समझ लेता है कविता
वो स्टेटस भी मेरा अब ध्यान से पढ़ने लगा है।।

तुम जो गयीं सब छोड़ भागे और वो भी चलती बनी
तुम आ गयीं उसको भी आना है शरम को याद हो
माना  कि  मजबूरी  तुम्हारी  थी  मग़र  मेरी  ख़ता
फिर से न हों वो ग़लतियाँ इतना 'अगम' को याद हो।।

सबके दिलों पर राज कर अपनी नज़र में गिर गए
पिटते  हुए   कहते  रहे  पिटना  नहीं  आता   हमें
उसने हज़ारों दोष हम पर मढ़ दिए इक साँस में
इतना हमारा दोष था लड़ना नहीं आता हमें।।

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" माँ का प्यार " - Shreyansh kumar | कविताएँ | Sahity Live

" माँ का प्यार " - Shreyansh kumar

" माँ का प्यार "     Shreyansh kumar     कविताएँ     समाजिक     2021-09-22 10:15:00     500     107        
" माँ का प्यार "

ममता की तू अजब दुलारी प्यार में तू न्यारी है,
इस दुनिया में माँ तू मुझको सबसे ज्यादा प्यारी है,
तेरी प्यारी छाँव में मुझे दुख-दर्द कुछ नहीं होता है, 
तुझ से पल भर दूर रहूँ तो माँ मुझे यह संसार फीका सा लगने लगता है।
रिश्ते, मर्म,प्यार की गजब निशानी माँ तू अरमानो का सागर है,
मेरे प्यारे से इस मुखडे की माँ तू ही तो एक निशानी है,
अरमानो को पाने के लिए शहर को मैं निकला हूँ, 
तेरा प्यार नहीं है मेरे पास निज इस दुख को सहता हूँ ।
होटलों की रोटी मे जब स्वाद मुझे नहीं आता है,
तेरे प्यारे हाथों की रोटी का वह गस्सा याद मुझे हमेशा आता है,
अपने दुख-दर्द का तू कभी दिदार नहीं करती,
माँ तू मुझे कभी किसी चीज के लिए इंकार नहीं करती ।
राम, क्रष्ण, महावीर भी तेरी गोदी मे खेले है,
इस दुनिया के हर भगवान की मूरत में माँ मैंने तेरे चहरे देखे है।

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बढ़ते कदम - Rambriksh, Ambedkar Nagar | कविताएँ | Sahity Live

बढ़ते कदम - Rambriksh, Ambedkar Nagar

बढ़ते कदम     Rambriksh, Ambedkar Nagar     कविताएँ     समाजिक     2021-09-22 10:15:00     #वीर रस की कविता#प्रेरणार्थक कविता#ambedkarnagarpoetry#rbpoetry#बढ़तेकदम कविता#बहादुरीपरकविता#रामबृक्षकृतिकविता#मुसाफिरसम्बंधीकविता#नयीकविता#नयीकविताहिन्दीमें#मुसाफिरतानलेयदितीर अपना कविता     107        
बढ़ते कदम

शीर्षक-   बढ़ते कदम
 मुसाफिर!
       तान ले यदि तीर अपना मंजिल की ओर 
       सोंचकर उम्मीदों पर खरे उतर रहे हम ,
       दुनिया तुम्हारा नाम क्यों याद रखेगी ?
       बस छोड़ दे तीर यह समझकर ,
       है केवल सोंच और कर्मों में दम |
       प्रकृति के हो खिलौने निराले ,
      खेल-खेल में हो रोशन कर दे चमन ;
      टूट जाओगे समय से पहले समझते हो यही ,
      समय के चक्र से अछूता है कौन ?
      समय पर जीना मरना ही है प्रकृति का नियम ||मुसाफिर !
      चल पड़ जिधर मंजिल है तेरी ,
      मत देख नीचे कंकड़ पड़ा ,
      देंगे केवल ठोकरे ना रुकेंगे तेरे बढ़ते कदम |
      मंजिल गले लगा लेगी जिस दिन तुम्हें ,
      मिटेगी हर क्लेष जलेगी प्यार की ज्योति मन में,
     लगेगा छू लिया आसमान आंखों से बरसेगी मोती ,
     जीवन का रहस्य समझ पाया ना कोई ,
     बस समर्पण कर दे खुद को,
      सफलता खुद चूमेगी तेरी बढ़ते कदम ||
 
         Rambriksh, Ambedkar Nagar
 

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बस तू चलना मत छोड़ना😊 - Narayan Choudhary | कविताएँ | Sahity Live

बस तू चलना मत छोड़ना😊 - Narayan Choudhary

बस तू चलना मत छोड़ना😊     Narayan Choudhary     कविताएँ     अन्य     2021-09-22 10:15:00     Motivation# life motivation# #     107        
बस तू चलना मत छोड़ना😊

तू दौड़ में अव्वल आए ये 
      जरूरी नहीं,
तू सबको पीछे छोड़ दे ये भी 
     ज़रूरी नहीं।
ज़रूरी है तेरा दौड़ में शामिल
             होना,
ज़रूरी है तेरा गिर कर फिर से             
       खड़ा होना।
जिन्दगी में इम्तेहान बहुत होंगे,
आज जो आगे है कल तेरा पीछे           
                होंगे।
बस तू चलना मत छोड़ना,
बस तू चलना मत छोड़ना।
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प्रेम - Vipin Bansal | कविताएँ | Sahity Live

प्रेम - Vipin Bansal

प्रेम     Vipin Bansal     कविताएँ     प्यार-महोब्बत     2021-09-22 10:15:00     #प्रेम     107        
प्रेम

प्रेम का तन से कैसा नाता ! 
प्रेम की है ये कैसी भाषा !! 

प्रेम बिछोह है, प्रेम मिलन है ! 
प्रेम अगन है, प्रेम लगन है !! 

प्रेम सुरों की इक धड़कन है ! 
प्रेम सुरों की इक सरगम है !! 

प्रेम है पीड़ा, प्रेम जख्म है !
प्रेम के ही ये सारे रंग है !! 

कहाँ गए वो रंगने वाले ! 
प्रेम की खातिर मरने वाले !! 

प्रेम नहीं अब तन के शिकारी ! 
इनकी तृष्णा बस है नारी !!

प्रेम से बस अब छलना आता ! 
प्रेम की बदली है परिभाषा !!

प्रेम का तन से कैसा नाता ! 
प्रेम की है ये कैसी भाषा !! 

लिखे लेखनि दे परिभाषा ! 
प्रेम है मीरा, प्रेम है राधा !! 

प्रेम में डूबे बंसी वाले ! 
प्रेम है गोपी, प्रेम है ग्वाले !!

प्रेम के फन पे धरा बिराजै ! 
कालिया फन पे कान्हा नाचे !! 

माखन चोरी करके खाना ! 
नदी किनारे वस्त्र चुराना !! 

प्रेम का ही था वो नजराना ! 
प्रेम लुटाने आया कान्हा !! 

कान्हा का रूप अनोखा ! 
प्रेम देवकी, प्रेम यशोदा !! 

अश्रु नीर से चरण थे धोए ! 
पाँव पकड़ कर कान्हा रोए !! 

दरिद्रता देखो प्रेम से हारी ! 
कृष्ण सुदामा की वो यारी !! 

खाकर प्रेम के तीन है दाने ! 
तीनों लोक लगे लुटाने !!

प्रेम की खींची ऐसी रेखा !  
प्रेम नहीं वो अबतक देखा !! 

तन नहीं मन से था नाता ! 
प्रेम की थी वो ऐसी भाषा !!

प्रेम का तन से कैसा नाता ! 
प्रेम की है ये कैसी भाषा !!

      विपिन बंसल 

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बल है_बुद्धि है_विद्या है, सारे जहां के खुशियां भी है। पर जब बात आयेगी, स्मिता रक्षा की तो, कदापि चुप नहीं बैठना है।

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तकदीर - Shakuntala Sharma | शायरी | Sahity Live

तकदीर - Shakuntala Sharma

तकदीर     Shakuntala Sharma     शायरी     प्यार-महोब्बत     2021-09-22 10:15:00     # तकदीर लिखने वाले# कलम# गैर अपने#     107        
तकदीर

तकदीर लिखने वाले ने तो कोई कमी नही की |
अब लिखते समय हाथो से कलम ही टुट जाये तो
कोई क्या करे।

सफर में साथ तो सभी चलते है मगर हाथो से सनम का हाथ ही छुट जाये तो कोई क्या करे ॥

हम बेवफा नही थे कभी . मोहब्बत हमें रास ना आई ' कुछ मजबूरियो ने लुटा तो कोई अपने गैर निकल जाये तो कोई क्या करे।
""""""""""""""",,,,,,,,,,,,,,,,,""""""""""""""""'''""",,,,,,,,,,,,,,,,,,,
शकुन्तला शर्मा

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शेर - फूल गुफरान | शायरी | Sahity Live

शेर - फूल गुफरान

शेर     फूल गुफरान     शायरी     प्यार-महोब्बत     2021-09-22 10:15:00         107        
शेर

दिल की आवाज़ बन गए तुम
धडकनों का साज़ बन गए तुम 
बिना तेरे जीय मे अब कैसे
जिंदगी का एहसास बन गये तुम




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मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ - मारूफ आलम | शायरी | Sahity Live

मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ - मारूफ आलम

मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ     मारूफ आलम     शायरी     राजनितिक     2021-09-22 10:15:00     # political shayari# social poetry# najm#नज्म     107        
मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ

जालिमों की हिरासत मे जलता हूँ
अपने घर,अपनी रियासत मे जलता हूँ
तुम मुझे पहचानते हो ऐ दुनियाँ जहाँ वालो
मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ
मैने मूसा से ईसा का जमाना देखा है
मैंने कई सल्तनतों का आना जाना देखा है
मगर इतिहास गवाह है कभी भी 
इजराइल नही था मैं
मैं आज भी फिलीस्तीन हूँ और कल भी
फिलीस्तीन था मैं
मेरे भाईयों मे मुझको लेकर इख्तेलाफ बहुत हैं
मेरे अपने ही मेरे खिलाफ बहुत हैं
अपने बुजुर्गों की विरासत मै जलता हू
मै फिलीस्तीन हूँ सियासत मै जलता हूँ
हर सदी मे अपने लाखों लोगों को खोता हूँ
मैं बारूदों से जख्मी होकर सदी दर सदी रोता हूँ
मेरा फैसला ना जाने क्यों नही होता
मैं कमजोर हूँ शायद यूँ नही होता
दम घुटता है सदियों से हिरासत मे जलता हूँ
मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ
मारुफ आलम







    

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