शायरी

नवीनतम शायरी

मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ
मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ

जालिमों की हिरासत मे जलता हूँ अपने घर,अपनी रियासत मे जलता हूँ तुम मुझे पहचानते हो ऐ दुनियाँ जहाँ वालो मैं फिलीस्त

तुम बिन
तुम बिन

तुम्हारे बिन तुम्हीं से होंठ पर शबनम, तुम्हीं से नैन में शतदल । तुम्हीं से केश में थिरकन,तुम्हीं से कण्ठ में कलकल ।

शेर
शेर

बक्त और हालात से डर लगता है दिल के जज्बात से डर लगता हैं डर लगता है तेरे बिझड जाने से अब तो जिंदगी के हालत से डर लगता

ब्रेकप शायरी
ब्रेकप शायरी

प्यार में फसा के ,यू पागल बनाने की कोशिश करती हो तुम मुझपे मरती हो या किसी और पर मरती हो, अगर प्यार नहीं है ,तुमको मुझ

इन्तजार
इन्तजार

सुना है मेरे चाहने वालों की बहुत लम्बी कतार है तुम्हें आने में देर ना हो जाए मौत को भी मेरा इंतजार है

शेर
शेर

मन मे सबका अरमान नही होता हर कोई दिल का मेहमान नहीं होता जो धड़कनों मे समा जाए एक बार उसको भूलना आसान नहीं होता।।।

मेरे दिल का कोरा पन्ना अधूरा रह गया
मेरे दिल का कोरा पन्ना अधूरा रह गया

मेरे दिल का पन्ना कोरा रह गया, कभी भरा नहीं रंग बेरंग रह गया, किया था सच्चा प्यार फिर भी अधूरा रह गया।

उम्मीद
उम्मीद

क्यों देखते हैं तुम्हारी राह जब तुम्हे पाने तक की उम्मीद नहीं

सवाल हल कर जाती है
सवाल हल कर जाती है

बिन कहे तेरी आंखें बातें कर जाती है, मिल के बहुत से सवाल हल कर जाती है।

इससे बड़ी कोई खुशी नहीं
इससे बड़ी कोई खुशी नहीं

किसी को खोकर पाओ इससे बड़ी कोई खुशी नहीं, किसी को दिल से चाहो और वो दिमाग लगाता रहे इससे बड़ी कोई दगा नहीं।

मेरे मुस्कुराने में
मेरे मुस्कुराने में

वफ़ा तो बहुत की मैंने, इस जमाने में, मगर किसी ने भी नहीं रखें, ख्याल मेरे मुस्कुराने में।

देश की दशा
देश की दशा

देश के उन्नति खतिर, ऐ लोग कुछ नहीं करते हैं. बस कुर्सी पाके , अपनी ही झोली भरते हैं..|

© 2021 | All rights reserved by Sahity Live® | Powered by DishaLive Group