शहीद- जोरू - Santosh kumar koli

शहीद- जोरू     Santosh kumar koli     कविताएँ     देश-प्रेम     2021-09-26 15:53:42     शहीद की जोरू, शहीद की पत्नी     10000     5.0/5 (1)    
शहीद- जोरू

मन तो मन है, कैसे इसे टोकूं मैं ?
रो रहा है हर समां,
प्रिय कैसे आंसू रोकूं मैं ?
आना था,
मुन्ने के नामकरण जश्न में।
पहले ही आ गए,
लिपट तिरंगे कफ़न में।
गुलज़ार होने से पहले ही,
मायूसी छाई चमन में।
सिसक रही है हर सिसकारी,
झांक जीवन सूनेपन में।
यादगार लमहे रो रहे,
कैसे मन को टोकूं मैं ?
रो रहा है हर समां,
प्रिय कैसे आंसू रोकूं मैं ?
जाते थे सरहद पर,
तनहा रोती थी पिया।
तेरी सांस मेरी सांसों के,
जीने का थी जरिया।
मेरे साथ मुन्ने को भी,
रोता छोड़ दिया।
जीवन निरंक कागज़,
लिखा बहा आंसू दरिया।
दिल बना दर्द सागर,
कैसे इसको सोखूं मैं ?
रो रहा है हर समां,
प्रिय कैसे आंसू रोकूं मैं ?
खाने दौड़ती है,
निज जीवन तनहाई।
चाहूं जितना भूलना,
तेरी आए याद सवाई।
ज़्यादा कायर जी नहीं सकती,
भारत मां की जाई।
सरहद पर फिर सीस चढ़ेंगे,
मुन्ने की अगुआई।
कायरता से देश धर्म को,
कैसे जोखूं मैं ?
रो रहा है हर समां,
प्रिय कैसे आंसू रोकूं मैं ?

Related Articles

ये मेरा हक है
ये मेरा हक है

बड़े प्यार से, मां के गोद में, बैठे बैठे पूछा गीले बिस्तर पर क्यों सोती मुझे सुलाती सूखा तीखा तीखा लात मरता तुझको लग

काश कोई इस सुने दिल में फिर से दीप जला जाए
काश कोई इस सुने दिल में फिर से दीप जला जाए

काश कोई इस सुने दिल में फिर से दीप जला जाए अपनों की इस दुनिया में अपनों की परिभाषा बतला जाए कुछ सपने हैं, जो अपनों के

मां तो मां
मां तो मां

चाहे किसी से शुरू करूं, चाहे किस पे खत्म करूं,, त्याग एवं प्रेम उन सब पर भारी होगी मां का, भगवान को भी सोचना पड़ जाएगा


Please login your account to post comment here!
सूर्यवंशी प्रदीप मौर्य     rated 5     on 2021-09-09 12:28:10
 

© 2021 | All rights reserved by Sahity Live® | Powered by DishaLive Group