नशा ज़िन्दगी का था - Shubhashini singh

नशा ज़िन्दगी का था     Shubhashini singh     कविताएँ     प्यार-महोब्बत     2021-09-22 10:16:16     Google /Yahoo/Bing /instagram/Facebook/twitter     4240        
नशा ज़िन्दगी का था

नशा ज़िन्दगी का था
था अब नशा है मौत का है।
ख़्वाब ये हमारा ही था।
अब चाहत मौत की है।
सफर शुरू किया हमने ही था।
अब खत्म हमसे ही है।
कभी चाहत बस तुमसे ही थी।
अब तुम्हारी चाहत बदली सी है।
कभी खुश रहना हम भी चाहते थे। 
अब हर तरफ दुःख ही है।
नशा ज़िन्दगी का था। 
अब नशा मौत का है.....
                                  
                                सुभाषिनी सिंह

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