मन - Chetna

मन     Chetna     कविताएँ     अन्य     2021-09-22 10:45:02         4036        
मन

सभी की जिंदगी में एक 
ऐसा मोड़ भी आता है 
जब हम पीछे रह जाते हैं
 मन् आगे आगे जाता है 
तनहाई अच्छी लगती है फिर
 खुद से ही प्यार हो जाता है 
अंधेरों से मन घबराता है 
परछाइयों से डर जाता है 
तब एक मन का चिराग ही
 जलकर उजियारे में ले जाता है
 जिंदगी भी समझ आने लगती है 
खुद से ही प्यार हो जाता है।

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