ख़्वाब - Vipin Bansal

ख़्वाब     Vipin Bansal     कविताएँ     दुःखद     2021-09-22 10:26:47     #ख़वाब     5179        
ख़्वाब

ज़िंदगी पर मत कर गरूर इतना !
दिलो से जो बेघर हो जाए !!

कुछ नहीं बुलबुला है जिंदगी !
न जाने कब ख़्वाब हो जाए !!

गर मिटे तो निशां छोड़ ऐसे !
ये ख़्वाब जिंदगी में तब्दील हो जाए !

जिंदगी को कर हँसी इतना !
गैरों की दुआओं में शरीक हो जाए !!

हर निगाह ढूंढे तुझे !
जब तू ख्याल हो जाए !! 

महोब्बतें खुशबू में नहा ले इस कदर !
मौत भी चमन हो जाए !! 

किसी के ख़्वाब में गर जो आएँ !
वो निगाहें जन्नत हो जाए !!

हमारी याद में गिरे आँसू !
हर आँख सागर हो जाए !! 

विपिन बंसल

Related Articles

बिसरी डगर
बिसरी डगर

कच्ची मिट्टी, कच्ची चुनाई, घर थे कच्चे। जुड़ाव था मिट्टी से, रिश्ते थे सच्चे। रिश्तों को निभाते नहीं, जीते थे। रिश्

लग्न
लग्न

✨✨ᑭYᗩᖇ ՏIᖇᖴ ᗩᑭᑎᗴ Kᗩᗰ Oᖇ IՏᕼᐯᗩᖇ Տᗴ KᖇO Yᗴ ᗪOᑎO KᗷᕼI ᗪᕼOKᕼᗩ ᑎᕼI ᗪᗴᘜᗴ ✨✨

बंजर करके छोड़ेगा
बंजर करके छोड़ेगा

और कितना बवंडर करके छोड़ेगा वक़्त क्या सब खंण्डहर करके छोड़ेगा हाकिम खुश है अपने फैसलों पर लगता है सब बंजर करके छ


Please login your account to post comment here!

© 2021 | All rights reserved by Sahity Live® | Powered by DishaLive Group