मैं जुगनू होता तो - Rupesh Singh Lostom

मैं जुगनू होता तो     Rupesh Singh Lostom     कविताएँ     अन्य     2022-08-14 15:53:10     मैं जुगनू होता तो     49780           

मैं जुगनू होता तो

जुगनू के जैसा 
हम होते तो 
कैसा होता 
दिन में जागते 
रात में चमकते 
न अँधेरे का डर 
न खौफ होता 
जाहा पाते जाते 
न किसी का भैये 
न कोई रोकने बाला 
नहीं बात बात में 
हर बात में 
टोकने बाला 
बस रात होती 
कही घन घोर अँधेरा 
कही ओस में 
लिपटा रात तो 
धुंध में सराबोर तो 
कही अंधकार का 
सीना चीरता 
बे फ़िक्र नीडर सेवेरा 
मैं जुगनू होता तो
क्या बात होता 
न कमाने की चिंता 
न घरबालों का डाट
न पत्नी लड़ती झगड़ती 
बस अपना पूरा धरती 
सारा आश्मान होता 


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