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गांव और मैं-धूप की तपन में या अंधेरों से किनारा

Anjani pandey (sahab) 19 Nov 2023 शायरी अन्य 11580 0 Hindi :: हिंदी

धूप की तपन में या अंधेरों से किनारा
हजार हजार ख्वाहिश की कल्पना है सारा
और मन को बहलाने की कोशिश ही बेकार है
मन लगता है अपने गांव में और वही नदी का किनारा

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