डाका - Vipin Bansal

डाका     Vipin Bansal     कविताएँ     राजनितिक     2021-09-22 11:26:08     #डाका     4272     5.0/5 (1)    
डाका

सपने दिखाकर हमको !
नींदो पे डाका डाला !!
बातों की देके रोटी !
खा गए हमारी बोटी !!
देखी है इनकी रहमत !
ऐसी है इनकी ख़िदमत !!
लूट रही है देखो !
बेटियों की अस्मत !!
तिरगी का देखो !
ये कैसा बोलबाला !!
तिरगी ने देखो !
चिरागों पे डाका डाला !!
सपने दिखाकर हमको !
नींदो पे डाका डाला !!

काल बना कोरोना !
हर तरफ था रोना !!
सांसो की थी लड़ाई !
अपनो को दी विदाई !!
बीमारी से वो भी लड़ते !
निहत्थे न ऐसे मरते !! 
गर जो तुम न अपनी !
ऐसे जेबे भरते !!
बीमारी को भी तुमने ! 
व्यापार बना डाला !!
सपने दिखाकर हमको !
नींदो पे डाका डाला !!

लड़ते झगड़ते तुमने !
पूरा समय निकाला !! 
बातों का अपनी तुमने !
ऐसा जाल डाला !! 
पिला - पिला के पानी !
सबको मार डाला !!
रेवडियाँ खिला - खिला के !
घर को चांट डाला !!
वादों पे इनके हमने !
अपना वोट डाला !!
अपने ही हाथों अपना !
गला घोंट डाला !!
सपने दिखाकर हमको !
नींदो पे डाका डाला !!

    विपिन बंसल

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