भारत भाग्य विधाता - Rambriksh, Ambedkar Nagar

भारत भाग्य विधाता     Rambriksh, Ambedkar Nagar     कविताएँ     देश-प्रेम     2021-09-22 10:16:08     #भारत भाग्य विधाता कविता#ambedkarnagarpoetry#rbpoetry#प्रसिद्ध हिंदी कविताएँ#आधुनिक कविताएँ#सभी कवियों की कविताएं#सबसे अच्छी कविता#कविताएं हिंदी में लिखी हुई#छोटी सी कविता हिंदी में     8896        
भारत भाग्य विधाता

भटक रही थी बूढ़ी महिला
तम तमाती धूप में |
अधमरी सी झुकी खड़ी थी, 
कंकाल के रूप में  ||
उपल ,कण्डा उठा उठा कर ,
भर रही थी टोकरी. |
चाह जीने की प्रबल थी, 
मार रही थी भुखमरी, |
कोई खाए जूठा पत्तल,
सोये सड़कों के फुटपाथ |
भारत का तु भाग्य विधात्री, 
आज बनी है तु अनाथ,||
एक चार की बात नहीं है, 
अरबों हैं तेरे संतान,|
कहां छिपा ज़मीर तुम्हारा , 
मानवता के इंसान, ||                         
किस भारत माता की सदा,
कर रहे हो जय जयकार |
मां तो भटक रही सड़को पर,
हो रहा कैसा अपकार?
देश कभी न बड़ा बनेगा,
यदि होगा जन का अपमान,|
भारत का तु भाग्य विधात्री,
यह कैसी तेरी सम्मान ||
धरती तु है भारती तु है,
भारत भाग्य विधाता तु है,|
गॉंव देश की बात करू क्या?
पूरे विश्व की माता तु है ||
 कब तक होगा अपमान तुम्हारा
कब तक सहोगी अत्याचार
अब होगा सम्मान तुम्हारा
मातृदिवस के रूप में
पूजी जाओगी माता तुम
मां भारती स्वरूप में ||
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