Jagah - Sadhana devi

Jagah     Sadhana devi     कविताएँ     समाजिक     2021-09-22 11:35:30     सामाजिक उल्लेख     4516        
Jagah

जा ऊ कहॉ हर तरफ आग लगी हैं
चाहत के नाम पर मुश्किल बडी़ हैं
सामाजिक की। जंजीरों मैं जकडां 
सारा हिन्दू स्थान हैं
जगह - जगह मचा को हे राम हैं
 सामाजिक की। जंजीरों मैं फस गया हूं 
प्यार सी वाजी हर कर खुदा के
दर पर आ गया हूं


My love India

Jay hind 
Yavi Kash yap

Related Articles

बच्चा अंधविश्वासी कैसे बनता है ?
बच्चा अंधविश्वासी कैसे बनता है ?

हमारे यहाँ पढ़ने वाले छात्रों को किताबों में पढ़ने के लिए जो मिलता है उस का उल्टा उन्हे अपने परिवार वाले,धर्मग्रंथो

यह कविता राबड़ी देवी के बिहार मुख्यमंत्री के शासन काल की हैं जो मैं अब आप लोगों के बीच में लेकर आ रहा हुँ जंगल राज
यह कविता राबड़ी देवी के बिहार मुख्यमंत्री के शासन काल की हैं जो मैं अब आप लोगों के बीच में लेकर आ रहा हुँ जंगल राज

कहीं अश्क कहीं क्रंदन कहीं घर बने श्मशान! राबड़ी के राज में हुआ जंगल राज! कैसी यह हवा चली! कुम्हलाया है हर तरुण-कुच

शिक्षक ज्ञान का महाआगार
शिक्षक ज्ञान का महाआगार

कविता का शीर्षक- "शिक्षक ज्ञान का महाआगार" ज्ञान-विज्ञान का महासागर है, गुरु नूतन पंथ का अन्वेषी। तिमिर में प्


Please login your account to post comment here!

© 2021 | All rights reserved by Sahity Live® | Powered by DishaLive Group