कविताएँ

नवीनतम कविताएँ

नमन मेरी मातृभाषा
नमन मेरी मातृभाषा

नमन मेरी मातृभाषा नमन उस भाषा को जो हमें संस्कार देती है नमन मेरी हिन्दी को जो भावों को स

कविता, आतंकवाद से लडे़।
कविता, आतंकवाद से लडे़।

हिंदू मुस्लिम ईसाई सरदार। खत्म करे देश का आतंकवाद। आतंकवाद मानवता का दुश्मन। इसे मिटाना हर नागरिक का कर्त्तव्

* वादा-खिलाफी *
* वादा-खिलाफी *

#समसामयिक ** वादा-खिलाफी ** हाथ में, गंगा जल को लेकर, बंद करने का, वादा को कर, यह चीज खराब । सत्ता की सरकार दुकान म

बेटियां
बेटियां

बहुत खुश होता है ऊपरवाला तब गोद में आती हैं बेटियां युग कितने भी बदले आज भी लक्ष्मी ही कहलाती हैं बेटियां जिम्मे

आज
आज

अब झूठे आरोपों से कोई सीता वनवास नहीं सहेगी भरी सभा में कोई द्रौपदी अब अपमान नहीं सहेगी कोई भी मेरा अब प्रेम में

मिलने की खुशी
मिलने की खुशी

आंखों में हल्के हल्के आंसू थे अधरों पर मीठी मीठी मुस्कान देह में हल्की-हल्की सिमटन थी और रोम रोम में खुशी की फुहा

हरपल
हरपल

हरपल मुस्कुराते रहिए जीवन एक सुंदर नदियां है खुशियों की नाव चलाते रहिए मौसम का बदलाव तो प्रकृति है उतार चढ़ाव ज

एकलव्य
एकलव्य

धनुष था मेरे बाणों का दर्पण चमत्कारी वैभव भुजाओं में निषाद पुत्र का अंश सवेरा चला था स्वर्ण बहारों में नादान अ

दारू का पहाड़ा
दारू का पहाड़ा

दारू एकम दारू - महफिल हुई चालू दारू दुनी गिलास - मजा आएगा खास दारू तिया वाईन - टेस्ट एकदम फाइन दारू चौके बियर

प्यार में गुड़ाखू करना।
प्यार में गुड़ाखू करना।

सुना है इश्क में कुत्ते भी आचार खाते है। वो पागल लोग है जो प्यार में गुड़ाखू करते है। मोहल्ले में हमारे एक आदमी आश

कला
कला

ए शारदा माँ झूठ बोलने की मुझे कला दे दो ! भेद सके न जिसको सच,ऐसा मुझे कवच दे दो !! सच सुनने की अब, किसी को आदत नहीं । सच क

अरमाँ
अरमाँ

बिखरे बिखरे पड़े हैं मेरी आँखों में मेरे अधूरे से अरमाँ। और ये पङे पङे मेरी आखों में ही नित रोते हैं। और जब ये बिखर

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