मन के धागे - Chetna

मन के धागे     Chetna     कहानियाँ     अन्य     2021-09-22 10:25:38         9489        
मन के धागे

रोका था मन के धागों को
बड़ी सहजता से उलझने से
एक विश्वास ही था साथ मेरे
खुदके हौसलों को परखने से
पंखों को समेटकर रक्खा था
हमने हर उड़ान से पहले
यें आसमां भी अपना हैं
और हौसलों भी अपने
मन को स्वतंत्र और ऊंची उड़ाने भरने दो

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