मन चाहता है - Ajeet

मन चाहता है     Ajeet     कविताएँ     अन्य     2022-08-14 10:49:04     मन चाहता हे     21568           

मन चाहता है

मन चाहता है |

चाँद पर बेठकर देखूँ 
आसमान में बिखरे तारो को 
अपने हातों से समेट कर देखूँ ,
मन चाहता है |
बहते आशुओं से 
आसमान के बादलो को 
भिगोकर देखूँ ,
मन चाहता है |
सूरज की रोशनी को 
हवा से बुझाकर देखूँ ,
इसकी धूप को रूठे 
अपनों से मिलाकर देखूँ ,
मन चाहता है |
नंगे पाँव चाँद पर 
चढकर देखूँ ,
चाँद की चाँदनी को 
अंधेरों में छुपाकर देखूँ ,
मन चाहता है |
तारों की छाओं में बेठकर
एक कविता में भी लिखकर देखूँ ,
मन चाहता है |

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