भक्ति गीत - Ratan kirtaniya

भक्ति गीत     Ratan kirtaniya     गीत     धार्मिक     2021-09-22 11:47:00     माँ सरस्वती की वँदना है जो ज्ञान की लिए और सत् राह मे चलने के लिए माँ की चरणों मे वन्दना करता है     25720        
भक्ति गीत

 समपिर्त ए जीवन हमारा
तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा                  
क्षमा  करके मेरे  हर भूल
चरणों मे खिलने दो हमें बनके फूल
आया द्वार पे तुम्हारें
प्यासा हूँ मैं अज्ञानी
जला दो ज्योति
पीला दो एक बूँद ज्ञान की पानी
समपिर्त ए जीवन हमारा 
तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा
सुबह -शाम कँरू आरती
मूर्ख हूँ बन जाओ ना
इस जीवन की सारथी
झल कपट बेइमानी से बचकर
सत् पुण्य की राह मे चलूँ
इतनी सी है. अभिलाषा
चरणों मे तुम्हारें, फूल बनके खिलूँ
समपिर्त ए जीवन हमारा
तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा
बच्चा हूँ अँधकार से लगता है डर
मुझ पे करो उपकार
मिटा दो अँधेरा 
ज्ञान की दीप जलाकर
जल बनके जल मे मिल जाऊँ
काँटों मे फूल बनके खिल जाऊँ
डगमगाए ना कदम 
इसलिए हवाले करता हूँ तुम्हें
ए जीवन हमारा
समपिर्त ए जीवन हमारा
तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा
इतनी सी है अभिलाषा
जन्म-जन्म से हूँ प्यासा
एक बूँद ज्ञान जो मिले तुम्हारा
बुझ जाएगा प्यास हमारा
पास मुझे तू बुलाकर
उर मे दीप जलाकर
फैले ज्ञान की ज्योति 
अँधेरा भाग जाए डरकर
समपिर्त ए  जीवन हमारा
तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमार

  

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भक्ति गीत

 समपिर्त ए जीवन हमारा
तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा                  
क्षमा  करके मेरे  हर भूल
चरणों मे खिलने दो हमें बनके फूल
आया द्वार पे तुम्हारें
प्यासा हूँ मैं अज्ञानी
जला दो ज्योति
पीला दो एक बूँद ज्ञान की पानी
समपिर्त ए जीवन हमारा 
तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा
सुबह -शाम कँरू आरती
मूर्ख हूँ बन जाओ ना
इस जीवन की सारथी
झल कपट बेइमानी से बचकर
सत् पुण्य की राह मे चलूँ
इतनी सी है. अभिलाषा
चरणों मे तुम्हारें, फूल बनके खिलूँ
समपिर्त ए जीवन हमारा
तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा
बच्चा हूँ अँधकार से लगता है डर
मुझ पे करो उपकार
मिटा दो अँधेरा 
ज्ञान की दीप जलाकर
जल बनके जल मे मिल जाऊँ
काँटों मे फूल बनके खिल जाऊँ
डगमगाए ना कदम 
इसलिए हवाले करता हूँ तुम्हें
ए जीवन हमारा
समपिर्त ए जीवन हमारा
तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा
इतनी सी है अभिलाषा
जन्म-जन्म से हूँ प्यासा
एक बूँद ज्ञान जो मिले तुम्हारा
बुझ जाएगा प्यास हमारा
पास मुझे तू बुलाकर
उर मे दीप जलाकर
फैले ज्ञान की ज्योति 
अँधेरा भाग जाए डरकर
समपिर्त ए  जीवन हमारा
तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमार

  

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