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नौका पार लगाए कौन
नौका पार लगाए कौन

नौका पार लगाए कौन प्रश्न पूछते प्रश्न खड़े हैं उत्तर साधे बैठे मौन । भँवरों के हैं नाविक सारे नौका पार लगाए कौन ?

नूर
नूर

कवि की न तुम कल्पना ! शायर की न शायरी !! सूरज की न तुम किरणें ! चाँद का नूर नहीं !! आँखे देख सब भूल गई ! किस नूर का तुम नूर

अगर करो तुम वादा मुझसे
अगर करो तुम वादा मुझसे

अगर करो तुम वादा मुझसे मरुधर में भी फूल खिलादूँ पर्वत को भी धूल बनादूँ अगर करो तुम वादा मुझसे प्राण ! मेरे संग च

तेरे प्यार मे हम
तेरे प्यार मे हम

तेरे प्यार मे हम सौ बार मरके , सौ बार लेँगे जनम तेरा हूँ तेरे ही रहेंगे हम हर वादेँँ रस्में - कस्में निभाएंगे जनम -ज

जो मेरे द्वारे तू आए
जो मेरे द्वारे तू आए

जो मेरे द्वारे तू आए प्राण-मरुस्थल खिल-खिल जाए साँस-डाल भी हिल-हिल गाए छोड़ झरोखे राज महल के जो मेरे द्व

तेरी नजरो के तीर
तेरी नजरो के तीर

तेरी नज़रों के ये तीर मेरे दिल को करें घायल,मेरी सांसों में तू है समाया मैं हूं तेरी पागल। मेरे दिल के आयने में झांक

प्यार आयगा
प्यार आयगा

जितना भी रूठो तुम जितना भी चीखो तुम अपनी करवाने को क्या क्या ना सीखो तुम आदत में जितना निखार आयगा उतना दिल को तु

मन टेर रहा है
मन टेर रहा है

ओ दीप ! तुझे मन टेर रहा है । प्यासे मृग-सी अँखियाँ लेकर पवन-पथिक को चिट्ठियाँ देकर पथ भटके बंजारे के ज्यों

वह मेरा संसार नहीं
वह मेरा संसार नहीं

वह मेरा संसार नहीं है । जहाँ हँसे बिन दिन ढल जाए । रात आँसुओं में गल जाए । टूट गिरें तारे यह कहकर, नील गगन में प्यार

तुज बिन
तुज बिन

तुझ बिन मेरा ठाँव कहाँ है तुझ बिन मेरा ठाँव कहाँ है ? अनजाना पथ धूल धुआँ है भटकाने को रात जवां है देख मुझे बाँ

भक्ति गीत
भक्ति गीत

समपिर्त ए जीवन हमारा तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा क्षमा करके मेरे हर भूल चरणों मे खिलने दो हमें बन

भक्ति गीत
भक्ति गीत

समपिर्त ए जीवन हमारा तुम्हारें चरणों मे हैं बन्दगी हमारा क्षमा करके मेरे हर भूल चरणों मे खिलने दो हमें बन

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