देश-प्रेम रचनाएँ

नवीनतम देश-प्रेम रचनाएँ

कविता, आतंकवाद से लडे़।
कविता, आतंकवाद से लडे़।

हिंदू मुस्लिम ईसाई सरदार। खत्म करे देश का आतंकवाद। आतंकवाद मानवता का दुश्मन। इसे मिटाना हर नागरिक का कर्त्तव्

कविता, नम्र आँखो से तेरी विदाई।
कविता, नम्र आँखो से तेरी विदाई।

नम्र आँखो से तेरी विदाई। तेरे शोक के लहरे छायी। भारत माँ के रक्षा करते हुए। तु अपना जान गवाये। मरते मरते तू मार ग

कविता, ओ गलवान के वीर शहीद।
कविता, ओ गलवान के वीर शहीद।

ओ गलवान के वीर शहीद। तू है कितना खुशनसीब। चारो तरफ तेरे ही। शोक के खबरे छायी। रो रही धरती अम्बर। रो रही पर्वत खा

उठा हिंदुस्तान
उठा हिंदुस्तान

बिछा था जब लहू माटी में वह भी दिन याद हैं मासूमों की चीखों से गूंजा आज का जलीया बाग़ हैं खोया था जो बंटवारे में

प्रण
प्रण

सेनानी भारत वर्ष के , पग पीछे हटा सकते नहीं । है संजोया वीरों ने जो , मान घटा सकते नहीं । बंदिश में गर कोई दर्द दे , तो

अरमान
अरमान

है चाहत यही अरमान यही कुछ करके गुजर जाने दो । इस अमर शहीदों की दुनिया में अपना भी नाम लिख आने दो।। है जो लोग गरीब उ

वतन से इश्क
वतन से इश्क

ना जाने लोग क्यूं शराब पीते हैं, वतन से इश्क करने का नशा क्या कम होता है........

मां
मां

एक मां से बेटे ने जो ख़ून की बूंदे पायी हैं उसने हंसकर भारत मां पे ही लुटाई हैं। सरहद पर वो बेटा हर हाल म

'हमारी मात्रभाषाहिन्दी'
'हमारी मात्रभाषाहिन्दी'

वर्ण वर्ण मिलकर वर्णमाला की शब्द वाक्य परिभाषा है मत भुलो हिन्दी हमारी मात्रभुमि की भाषा है हिन्दी की ये बोल चाल

भारत की नारी
भारत की नारी

गूंजी थी सन् सत्तावन में जो फिर वह आवाज जगानी है भारत की नारी कमजोर नहीं दुर्गा है ,मर्दानी है चूड़ी हों कंगन ह

हिन्दी मेरी पहचान
हिन्दी मेरी पहचान

हिंदी में ही जन्म हुआ है , हिंदी से पहचान मिली । हिंदी ने सभ्यता सिखायी, सभ्यता से ही शान मिली ।। पंत, तुलसी और बच्च

INDIAN ARMY
INDIAN ARMY

जहाँ में आया था तो क्या पहचान थी मेरी, वतन से इश्क करते ही मैं हिंदुस्तान हो गया.......

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