रचनाएँ

नवीनतम रचनाएँ

मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ
मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ

जालिमों की हिरासत मे जलता हूँ अपने घर,अपनी रियासत मे जलता हूँ तुम मुझे पहचानते हो ऐ दुनियाँ जहाँ वालो मैं फिलीस्त

बातों ही बातों मे बात कजा हो जाऐगी
बातों ही बातों मे बात कजा हो जाऐगी

बातों ही बातों मे बात कजा हो जाएगी नींद मारी जाएगी रात कजा हो जाएगी ये कैसा धरम है ये कैसे लोग हैं जिनकी अछूतों के

गरमागरम में क्या है?
गरमागरम में क्या है?

गरमागरम शराबी - गरम में क्या है? वेटर- चाउमीन है। शराबी- और गरम में, वेटर- सूप है । शराबी - और गरम में । वेटर - उबलता

नमन मेरी मातृभाषा
नमन मेरी मातृभाषा

नमन मेरी मातृभाषा नमन उस भाषा को जो हमें संस्कार देती है नमन मेरी हिन्दी को जो भावों को स

कविता, आतंकवाद से लडे़।
कविता, आतंकवाद से लडे़।

हिंदू मुस्लिम ईसाई सरदार। खत्म करे देश का आतंकवाद। आतंकवाद मानवता का दुश्मन। इसे मिटाना हर नागरिक का कर्त्तव्

तुम बिन
तुम बिन

तुम्हारे बिन तुम्हीं से होंठ पर शबनम, तुम्हीं से नैन में शतदल । तुम्हीं से केश में थिरकन,तुम्हीं से कण्ठ में कलकल ।

नौका पार लगाए कौन
नौका पार लगाए कौन

नौका पार लगाए कौन प्रश्न पूछते प्रश्न खड़े हैं उत्तर साधे बैठे मौन । भँवरों के हैं नाविक सारे नौका पार लगाए कौन ?

* वादा-खिलाफी *
* वादा-खिलाफी *

#समसामयिक ** वादा-खिलाफी ** हाथ में, गंगा जल को लेकर, बंद करने का, वादा को कर, यह चीज खराब । सत्ता की सरकार दुकान म

बेटियां
बेटियां

बहुत खुश होता है ऊपरवाला तब गोद में आती हैं बेटियां युग कितने भी बदले आज भी लक्ष्मी ही कहलाती हैं बेटियां जिम्मे

आज
आज

अब झूठे आरोपों से कोई सीता वनवास नहीं सहेगी भरी सभा में कोई द्रौपदी अब अपमान नहीं सहेगी कोई भी मेरा अब प्रेम में

मिलने की खुशी
मिलने की खुशी

आंखों में हल्के हल्के आंसू थे अधरों पर मीठी मीठी मुस्कान देह में हल्की-हल्की सिमटन थी और रोम रोम में खुशी की फुहा

हरपल
हरपल

हरपल मुस्कुराते रहिए जीवन एक सुंदर नदियां है खुशियों की नाव चलाते रहिए मौसम का बदलाव तो प्रकृति है उतार चढ़ाव ज

© 2021 | All rights reserved by Sahity Live® | Powered by DishaLive Group