समर्पण भाव - Nisha Dhiman

समर्पण भाव     Nisha Dhiman     कविताएँ     धार्मिक     2022-08-14 17:49:49         5199        5.0/5 (1)    

समर्पण भाव

आरंभ हो चुका है अंत का
अनंत में जो व्याप्त है,
शंखनाद उल्लास है
जगी ये कैसी प्यास है,
भाव विभोर हो चुकी
हृदय में उठती टीस सी,
बस नयन छलक रहे
एक समर्पण भाव है।।

हूं मैं नहीं, भ्रम टूटता मेरा
जो सब कुछ है, वहीं पर्याप्त है
कण,कण बांध रहा
इस पूरे ब्रह्मांड को,
सीप में ही मोती का
हो रहा विस्तार है,
भोर में उठ रही लहर
एक नये प्रकाश की,
आदि है, अनंत हैं
बस वही तो सर्वशक्तिमान है।।

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Nisha Dhiman     rated 5     on 2021-12-09 14:40:06
 बहुत सुन्दर रचना