मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ - मारूफ आलम

मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ     मारूफ आलम     शायरी     राजनितिक     2021-09-22 11:09:46     # political shayari# social poetry# najm#नज्म     145        
मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ

जालिमों की हिरासत मे जलता हूँ
अपने घर,अपनी रियासत मे जलता हूँ
तुम मुझे पहचानते हो ऐ दुनियाँ जहाँ वालो
मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ
मैने मूसा से ईसा का जमाना देखा है
मैंने कई सल्तनतों का आना जाना देखा है
मगर इतिहास गवाह है कभी भी 
इजराइल नही था मैं
मैं आज भी फिलीस्तीन हूँ और कल भी
फिलीस्तीन था मैं
मेरे भाईयों मे मुझको लेकर इख्तेलाफ बहुत हैं
मेरे अपने ही मेरे खिलाफ बहुत हैं
अपने बुजुर्गों की विरासत मै जलता हू
मै फिलीस्तीन हूँ सियासत मै जलता हूँ
हर सदी मे अपने लाखों लोगों को खोता हूँ
मैं बारूदों से जख्मी होकर सदी दर सदी रोता हूँ
मेरा फैसला ना जाने क्यों नही होता
मैं कमजोर हूँ शायद यूँ नही होता
दम घुटता है सदियों से हिरासत मे जलता हूँ
मैं फिलीस्तीन हूँ सियासत मे जलता हूँ
मारुफ आलम







    

Related Articles

एकलव्य
एकलव्य

धनुष था मेरे बाणों का दर्पण चमत्कारी वैभव भुजाओं में निषाद पुत्र का अंश सवेरा चला था स्वर्ण बहारों में नादान अ

आसान नहीं
आसान नहीं

आसान नहीं खुद से लड़ना अपनी उम्मीदों से झगड़ना आशाएं बढ़ती हैं जब जिंदगी से तब होता है खुद से रूबरू पढ़ना टकराते

Me shayar na hota to kya hota
Me shayar na hota to kya hota

Me shayar n hota to kya hota ? Kisi sukhe ped ki sukhi dali hota. Bin chand ki rat kali hota . Akhir me me shayar n hota to kya hota. 1.Bin bhojan ki ,thali hota. Kisi gunde ki ,gali hota. Bhedbhav ki ,bahti nali hota. Me shayad rang,gulabi hota. Akhir me shayer n ,hota to kya ho


Please login your account to post comment here!

© 2021 | All rights reserved by Sahity Live® | Powered by DishaLive Group