ADARSHPANDEY

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लेखक ,कवि, शायर,गीतकार

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स्त्री कहलाती है
स्त्री कहलाती है

झुकना होता है तो झ

विश्व की पुकार है
विश्व की पुकार है

विश्व की पुकार है अ

जिक्र भी होगा और फिक्र भी होगा
जिक्र भी होगा और फिक्र भी होगा

ज़िक्र भी होगा तु

उम्मीद भरे रास्तो पे ,अब चलना है मुझको
उम्मीद भरे रास्तो पे ,अब चलना है मुझको

लेखक आदर्श पाण्डेय

बेवफा सनम
बेवफा सनम

ये बेवफा सनम ना जान

आप की ख़त को ,आज पढ़ रहा हूँ।
आप की ख़त को ,आज पढ़ रहा हूँ।

आप की ख़त को ,आज पढ़ रह

मै बनारसी पान
मै बनारसी पान

लेखक आदर्श पाण्डेय

चांदनी की तरह
चांदनी की तरह

तुम्हे हर गली मोहल

मेरा माँ के आँगन से,ये शहर छोटा लगता है
मेरा माँ के आँगन से,ये शहर छोटा लगता है

मेरी माँ के आँगन से

तुम्हारी ही चाहतो ने हमे बिगाड़ा है।
तुम्हारी ही चाहतो ने हमे बिगाड़ा है।

तुम्हारी ही चाहतो

झुकी झुकी नजरों से कमाल कर गई
झुकी झुकी नजरों से कमाल कर गई

झुकी झुकी नजरों से

मशहूर होना है
मशहूर होना है

उसे लगता है मुझे मश

सुबह शाम या दोपहर रात है क्या
सुबह शाम या दोपहर रात है क्या

सुबह शाम या दोपहर र

तेरे जुल्फों की छाव में, बैठना चाहता हूँ।
तेरे जुल्फों की छाव में, बैठना चाहता हूँ।

तेरे जुल्फों की छा

पेट के लिए शहर जाना पड़ता है
पेट के लिए शहर जाना पड़ता है

पेट ख़ातिर गाँव से श

लेकिन दिल मे ख़्याल सब का उतरता है
लेकिन दिल मे ख़्याल सब का उतरता है

लम्हा जब गुजरता है

उसे प्यार की मेरे जिस्म पे
उसे प्यार की मेरे जिस्म पे

उसे प्यार की मेरे ज

ये ग़म भी हमसे जुदा है ।
ये ग़म भी हमसे जुदा है ।

ये ग़म भी हमसे जुदा ह

जग को प्रणाम् करू
जग को प्रणाम् करू

जग को मै प्रणाम करु

इश्क़ के नाव मे
इश्क़ के नाव मे

जो उलजत है तुम्हे इ

शहद के ज़िद मे जहर हो गया हूँ
शहद के ज़िद मे जहर हो गया हूँ

शहद के ज़िद मे ,जहर ह

झुकी झुकी नजरों से कमाल कर गई
झुकी झुकी नजरों से कमाल कर गई

झुकी झुकी नजरों से

आँगन सुना लगता है
आँगन सुना लगता है

अब इश्क़ की गुलामी